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हनुमान जी सिर्फ पराक्रम नहीं, सादगी-सेवा के भी प्रतीक:विजय कौशल जी महाराज बोले- जीवन में धैर्य है तो जीत पक्की

शहर में चल रही श्री हनुमान कथा के सातवें दिन शनिवार को भक्ति और अध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिला। पूज्य विजय कौशल जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन जीने की कला सिखाते हुए कहा कि बजरंगबली केवल शक्ति और पराक्रम के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे विनम्रता और सेवा के सबसे बड़े उदाहरण हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में इंसान को शारीरिक बल से ज्यादा आत्मबल और अच्छे विचारों की जरूरत है। सफलता का मंत्र,अनुशासन और ईमानदारी कथा के दौरान महाराज जी ने जीवन के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति तभी सफल हो सकता है जब वह अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करे। अनुशासन और सकारात्मक सोच ही इंसान को भीड़ से अलग बनाती है। जो व्यक्ति सत्य और धर्म के रास्ते पर चलता है, उस पर ईश्वर की कृपा हमेशा बनी रहती है। कठिन समय में ‘धैर्य’ ही सबसे बड़ा हथियार विजय कौशल जी महाराज ने युवाओं और श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है, लेकिन कठिन परिस्थितियों में जो धैर्य (पेशेंस) बनाए रखता है, वही आगे बढ़ता है। उन्होंने सादगी और उच्च विचारों को अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि अपने आचरण से समाज में बदलाव लाएं। दूसरों के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव रखना ही असली धर्म है। भजनों पर झूमे श्रद्धालु, भक्तिमय हुआ माहौल कथा के बीच-बीच में जब राम नाम और हनुमान जी के भजनों की गूंज हुई, तो पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमने लगे। महाराज जी ने बताया कि सच्चा धर्म मानव सेवा है। अगर हम दूसरों की मदद निस्वार्थ भाव से करते हैं, तो वही जीवन की सबसे बड़ी सार्थकता है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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