बिजनौर शहर में 29 मई 2014 को हुए सुशील हत्याकांड में कोर्ट ने आज सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद सभी पक्षों ने कोर्ट के निर्णय का सम्मान किया।यह घटना 29 मई 2014 की शाम को बिजनौर शहर कोतवाली क्षेत्र के श्री हॉस्पिटल के पास हुई थी। बदमाशों ने 45 वर्षीय सुशील कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल सर्विलांस के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक प्रॉपर्टी डीलर और एक पूर्व सभासद भी शामिल थे। पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपियों में सभासद पति वसीम अहमद (पुत्र फखरुद्दीन, निवासी मोहल्ला मीरदीगान), अतुल चौधरी (पुत्र आदित्य वीर, निवासी फरीदपुर उददा), नईमुद्दीन (पुत्र निजामुद्दीन, निवासी बुखारा), शुभम चौधरी (पुत्र सत्येंद्र चौधरी, निवासी फरीदपुर उददा), अरनव तोमर (पुत्र शौकीन, निवासी न्यू सिटी कॉलोनी बिजनौर) और हसीन अंसारी शामिल थे। तत्कालीन पुलिस अधिकारियों ने मीडिया को बताया था कि सुशील कुमार की हत्या 9.5 बीघा जमीन खरीदने के विवाद को लेकर की गई थी। पुलिस ने इस जमीन विवाद को ही हत्या का मुख्य मकसद बताया था। शनिवार को कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। आरोपियों के वकील अहमद ज़कावत ने बताया कि उन पर प्रॉपर्टी हड़पने का आरोप लगाया गया था, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिला। वकील के अनुसार, फर्जी गवाह पेश किए गए थे और हत्या के पीछे जमीन विवाद का मकसद भी साबित नहीं हो सका। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव को देखते हुए न्याय किया। वंही इस मामले में पूर्व सभासद व सभासद पति वसीम अहमद का कहना है कि हम लोगों को सुशील हत्याकांड में 120 बी का मुलजिम बनाया गया था। हम लोग बेकसूर थे और हमें अदालत पर पूरा भरोसा था । अदालत ने हम लोगों क बरी कर दिया है। इंसाफ की जीत हुई है।

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