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भातखण्डे विश्वविद्यालय में कथक संध्या का आयोजन:शताब्दी वर्ष समारोह में संगीत-नृत्य परंपरा जीवंत हुई

लखनऊ में भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय में शनिवार को कथक संध्या का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत यह कार्यक्रम भातखण्डे एलुमनी एसोसिएशन के सहयोग से कलामण्डपम प्रेक्षागृह में हुआ। इसमें बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का निर्देशन विश्वविद्यालय की एलुमनी डॉ. मीरा दीक्षित ने किया। शाम 3 बजे शुरू हुए इस आयोजन में कथक नृत्य की विविध शैलियों और भावों का प्रदर्शन किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. राघवेंद्र प्रताप सिंह के एकल कथक नृत्य से हुई। उन्होंने तीनताल में आधारित ‘राम स्तुति’ प्रस्तुत की। इसमें उपज, ठाठ, आमद, तिहाई, टुकड़े, परन और गत जैसे पारंपरिक अंग शामिल थे। उनकी प्रस्तुति का समापन शिव भजन के साथ हुआ। ‘आज माई मोहन खेलें होरी’ की प्रस्तुति इसके बाद होली की थीम पर आधारित समूह कथक नृत्य ‘आज माई मोहन खेलें होरी’ प्रस्तुत किया गया। इसमें चित्रांगदा मिश्रा, सुरभि निगम, तनुश्री, अरिंदम सिंह और मोहित गौतम ने प्रस्तुति दी।संगीत में जौहर पाल ने गायन किया, जबकि नितीश सिंह ने तबले पर और मो. जीशान ने सारंगी पर संगत दी।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह थीं। उन्होंने कलाकारों की सराहना की और ऐसे आयोजनों को भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बताया। ये रहे मौजूद कार्यक्रम का संचालन एलुमनी एसोसिएशन के सचिव गिरीश चंद्र बहुगुणा ने किया। समापन अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षा डॉ. सीमा भारद्वाज ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।इस अवसर पर आलोक कुमार पांडेय, नीरज शर्मा, डॉ. पूनम श्रीवास्तव सहित एलुमनी एसोसिएशन के कई सदस्य और अन्य कला प्रेमी उपस्थित थे।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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