शामली के थाना भवन कस्बे में एक जनता धर्मशाला के निर्माण में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। आरोप है कि दिल्ली-सहारनपुर रोड पर शामली बस स्टैंड के पास बन रही इस धर्मशाला के भराव कार्य में मिट्टी के बजाय कूड़े का इस्तेमाल किया गया है। लगभग 80 लाख रुपए से ज्यादा के इस भराव कार्य में अनियमितताएं उजागर हुई हैं। इस जनता धर्मशाला के निर्माण के लिए शासन ने लगभग 2 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की थी। आरोप है कि ठेकेदार ने सरकारी अधिकारियों की कथित मिलीभगत से मिट्टी के स्थान पर कूड़ा डालकर लाखों रुपए का गबन किया है।
मामले की गंभीरता तब सामने आई जब एक निर्माण कंपनी ने स्थल का सर्वेक्षण करने के बाद कूड़े के ढेर पर इमारत बनाने से इनकार कर दिया। कंपनी ने स्पष्ट किया कि ऐसी नींव पर निर्माण भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और जांच के आदेश दिए। हालांकि, अब तक जिम्मेदार ठेकेदार सिंघल और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ठेकेदार को न तो ब्लैकलिस्ट किया गया है और न ही सरकारी धन की वसूली की गई है। नगर पंचायत अध्यक्ष मुशारदा का कहना है कि यह कार्य जेई और अधिशासी अधिकारी की देखरेख में हुआ था और ठेकेदार का भुगतान भी किया जा चुका है। ऐसे में जिम्मेदारी तय करना और भी जरूरी हो जाता है। अगर इसी कूड़े के भराव पर इमारत खड़ी कर दी जाती और भविष्य में कोई बड़ा हादसा होता, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता? इस सवाल का जवाब देने के लिए न तो अधिकारी सामने आ रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि। वहीं, नगर पंचायत थाना भवन के प्रतिनिधि जितेंद्र राणा का कहना है कि धर्मशाला का यह कार्य करीब तीन साल पहले कराया गया था और उसका भुगतान भी हो चुका है। जबकि ठेकेदार द्वारा लगाए गए बोर्ड में कार्य वर्ष 2024 में पूर्ण होना दर्शाया गया है, जिससे पूरे मामले में और अधिक संदेह पैदा हो रहा है।

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