राजघाट अयोध्या में श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आज भव्य समापन हुआ। जीयर स्वामी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस महायज्ञ में अंतिम दिन 5000 यजमानों ने यज्ञ मंडप में पूर्णाहुति दी। इसके साथ ही विधिवत रूप से महायज्ञ संपन्न हो गया। पूर्णाहुति के बाद दूर-दूर से पहुंचे साधु-संतों को वस्त्र एवं दक्षिणा देकर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। वहीं हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। दोपहर 2 बजे से धर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों और दक्षिण भारत से सैकड़ों संत, महात्मा एवं पीठाधीश्वर शामिल हुए। मंच पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और जीयर स्वामी महाराज ने सभी संतों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। सम्मेलन में प्रमुख रूप से अहोविल जीयर स्वामी जी महाराज, चिन्ना जीयर स्वामी महाराज, विशेष प्रसन्न तीर्थ स्वामी जी महाराज, द्वारकेश लाल जी महाराज सहित कई संत एक मंच पर विराजमान रहे। इस दौरान का दृश्य अत्यंत दिव्य और आध्यात्मिक वातावरण से ओतप्रोत रहा। संतों ने अपने उद्बोधन में धर्म और राष्ट्र के संबंध पर प्रकाश डाला। गादी स्वामी महाराज ने कहा कि अयोध्या जैसी पावन भूमि पर इस प्रकार के यज्ञ का आयोजन अत्यंत पुण्यदायी है। वहीं चिन्ना जीयर स्वामी महाराज ने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए संत समागम और यज्ञ आवश्यक हैं, क्योंकि यही ज्ञान और संस्कार का आधार हैं। स्वामी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि जब तक समाज धर्म को नहीं समझेगा, तब तक राष्ट्र की रक्षा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि साधन और संसाधन होने के बावजूद यदि संस्कार न हों, तो वही साधन बोझ बन जाते हैं। मीडिया प्रभारी अखिलेश बाबा के अनुसार, इस आयोजन में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, दिल्ली और दक्षिण भारत सहित विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम की देखरेख अयोध्या नाथ स्वामी जी महाराज द्वारा की गई, जबकि आयोजन को सफल बनाने में कई कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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