विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) ने देश में बढ़ते जनसंख्या असंतुलन और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन के अंतरराष्ट्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि जनसंख्या का बिगड़ता गणित केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह भारत की सामाजिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक ‘टाइम बम’ की तरह है। उन्होंने दावा किया कि यदि हिंदू समाज ने अपनी जन्मदर में सुधार नहीं किया, तो भविष्य में भारत का वर्तमान स्वरूप बनाए रखना कठिन होगा। 2.5 साल में 13 लाख महिलाएं लापता, विहिप ने उठाए सवाल सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए मिलिंद परांडे ने चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा, जुलाई 2023 में संसद में दिए गए जवाब के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों में भारत से लगभग 13 लाख महिलाएँ गायब हुई हैं। इनमें 3 लाख लड़कियां नाबालिग हैं। हालांकि ये सभी ‘लव जिहाद’ का शिकार नहीं हैं, लेकिन एक बहुत बड़ी संख्या इसकी चपेट में है। उन्होंने केरल के एक बिशप और ब्रिटेन के ‘ग्रूमिंग गैंग्स’ का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदू बेटियों को लक्षित कर सामाजिक और पारिवारिक ढांचा तोड़ने की साजिश रची जा रही है। ‘हम दो-हमारे दो’ के नैरेटिव से हिंदू समाज को नुकसान हिंदू परिवारों में घटती बच्चों की संख्या पर बोलते हुए मिलिंद परांडे ने कहा कि ‘हम दो, हमारे दो’ या ‘हम दो, हमारा एक’ जैसे नैरेटिव ने हिंदू समाज को बुरी तरह प्रभावित किया है। बेहतर शिक्षा और सुविधाओं के नाम पर हिंदू समाज खुद अपनी आबादी कम कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा, आज देश में हिंदू जन्मदर कम हो रही है। यदि यही स्थिति रही तो राजनीतिक दबाव बढ़ेगा और आंतरिक सुरक्षा संकट में पड़ जाएगी। विहिप और संत समाज का आग्रह है कि हिंदू परिवारों में कम से कम दो या तीन बच्चे होने ही चाहिए।
अनुच्छेद 29 और 30 पर विहिप की नई मांग
शिक्षा संस्थानों में भेदभाव को लेकर विहिप ने एक बड़ा मोर्चा खोला है। मिलिंद परांडे ने बताया कि, हाल ही में संसद सत्र के दौरान संगठन ने 375 से अधिक सांसदों से मुलाकात की है। विहिप की मांग है कि संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 के तहत अल्पसंख्यकों को मिलने वाले विशेष अधिकार जैसे धार्मिक शिक्षा देना और सरकारी हस्तक्षेप से मुक्ति अब देश के हर नागरिक और हर संस्थान को मिलने चाहिए। यह अधिकार केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं रहने चाहिए। अवैध धर्मांतरण और रामोत्सव के जरिए जागरण
लव जिहाद और अवैध धर्मांतरण को समाज की जड़ों पर प्रहार बताते हुए उन्होंने कहा कि, अब मौन रहने का समय निकल चुका है। उन्होंने रामोत्सव को केवल एक धार्मिक आयोजन न मानकर सांस्कृतिक पुनर्जागरण का जरिया बताया। भगवान राम का संदेश ही समाज को संगठित कर इन चुनौतियों से लड़ने की शक्ति देगा। विहिप ने स्पष्ट किया कि चाहे भाजपा शासित राज्य हों या अन्य दलों के, ‘जनसंख्या असंतुलन’ को राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय सुरक्षा के चश्मे से देखा जाना चाहिए।

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