डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के श्रवण बाधितार्थ विभाग ने एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम राजकीय संकेत विद्यालय और समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों के लिए था। इसका उद्देश्य अभिभावकों को दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास, शिक्षा, अधिकारों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में डॉ. रुपाली शर्मा ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय मिश्रा, संकेत विद्यालय के प्राचार्य हरिशंकर और समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय की प्राचार्या पुष्पा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। समाज में बधिर बच्चों को लेकर कई भ्रांतियां कार्यक्रम के समन्वयक और विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय मिश्रा ने बताया कि समाज में आज भी बधिर बच्चों को लेकर कई भ्रांतियां हैं, जो उनके विकास में बाधा डालती हैं। उन्होंने अभिभावकों को सही जानकारी और मार्गदर्शन की आवश्यकता पर जोर दिया। सहायक प्राध्यापक डॉ. सीताराम पाल ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, छात्रवृत्तियों और सुविधाओं की भी जानकारी दी। सहायक प्रोफेसर डॉ. चेत नारायण पटेल ने शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास के महत्व के बारे में बताया। बच्चों की शिक्षा के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा की विभाग के विशेष शिक्षक डॉ. अर्जुन प्रसाद ने बधिर बच्चों की शिक्षा के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा की। उन्होंने शीघ्र पहचान और समय पर हस्तक्षेप के लाभों को भी समझाया।अतिथि व्याख्याता डॉ. कौशलेन्द्र कुमार ने बधिरता के कारणों और शुरुआती लक्षणों की जानकारी दी। उन्होंने समय रहते उपचार और प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। सांकेतिक भाषा के महत्व को बताते हुए अमर ज्योति कौर ने कुछ सामान्य शब्दों का अभ्यास भी कराया। कार्यक्रम में अभिभावकों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उचित मार्गदर्शन से उनके बच्चों में सकारात्मक बदलाव आए हैं। एक अभिभावक ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम उन्हें नई दिशा और आत्मविश्वास प्रदान करते हैं।अंत में एक खुली चर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें अभिभावकों ने विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने उनके प्रश्नों का सरल समाधान प्रस्तुत किया।

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