भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत संभल की चंदौसी तहसील के गांव बैरनी में आयोजित किसानों की महापंचायत में शामिल हुए। उन्होंने किसानों से संगठित होने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार कई तरह के कानून ला रही है, जिनसे किसानों को नुकसान हो सकता है। टिकैत ने स्मार्ट मीटर, बिजली संशोधन बिल, बीज बिल, सिलेंडर बिल और डीजल बिल जैसे कानूनों का जिक्र किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसान संगठित नहीं हुए, तो सरकार उन्हें इन कानूनों के जाल में फंसा सकती है। बोले- महंगाई बढ़ाने का बहाना ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच तनाव के कारण गैस, पेट्रोल और डीजल की संभावित किल्लत पर टिकैत ने कहा कि यह केवल कीमतें बढ़ाने का बहाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि लड़ाई कहीं और हो रही है, लेकिन इसका असर ईंधन की कीमतों पर पड़ेगा। कहा- खनन प्राकृतिक प्रक्रिया अवैध खनन के मुद्दे पर, विशेषकर जुनावई थाना क्षेत्र में भाकियू (असली) के किसानों पर हुई कार्रवाई पर, राकेश टिकैत ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि खनन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। पहले किसान अपनी जरूरत के लिए नदियों से रेत निकालते थे, लेकिन अब इसे ‘अवैध खनन’ कहकर बाजारीकरण कर दिया गया है। अगर रेत नहीं निकाली तो खेत में फैलेगी टिकैत ने तर्क दिया कि नदियों में रेत पहाड़ों से आता है और यदि उसका खनन नहीं होगा, तो वह खेतों में फैल जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खनन होना चाहिए, लेकिन इसे अवैध घोषित करके इसका व्यवसायीकरण कर दिया गया है। किसानों- मजदूरों के खिलाफ सरकार डीएम कार्यालय पर हुए धरना-प्रदर्शन के संबंध में टिकैत ने कहा कि यदि किसान अपनी बात नहीं रखेंगे, तो सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपने समर्थकों का भी काम नहीं कर रही है, ऐसे में वह किसानों के लिए कुछ नहीं करेगी। टिकैत ने दावा किया कि यह सरकार बड़े उद्योगपतियों और व्यापारियों की है, और यह छोटे दुकानदारों, साप्ताहिक बाजार लगाने वालों, किसानों और मजदूरों के हितों के खिलाफ काम कर रही है।

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