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बेंगलुरु, मैसूर और ऊटी के टूर पर रवाना हुए पार्षद:7 दिवसीय भ्रमण पर नगर निगम 76 पार्षदों पर खर्च करेगा लगभग 55 लाख

आगरा नगर निगम के 76 पार्षद शनिवार को 7 दिवसीय स्टडी टूर पर रवाना हो गए। वे पहले बेंगलुरु, फिर ऊटी और मैसूर जाएंगे। वे इन शहरों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में होने वाले कार्यों को देखेंगे। इसके बाद अपने वार्ड में इसके क्रियान्वयन की योजना तैयार करेंगे।
3 शहरों की 7 दिन की यात्रा पर नगर निगम लगभग 55 लाख रुपये खर्च करेगा। सुबह 11 बजे नगर निगम से रवाना हुए
टूर पर जाने वाले सभी पार्षद सुबह 10 बजे नगर निगम कार्यालय पर एकत्रित हुए। यहां 3 बसें पहले से ही तैयार खड़ी थीं। यहां से सुबह 11 बजे दिल्ली एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए। शनिवार शाम को सभी पार्षद बेंगलुरु पहुंच जाएंगे। यहां 2 दिन रुकेंगे। इसके बाद ऊटी और मैसूर जाएंगे। सभी पार्षद 3 अप्रैल को टूर से लौटेंगे। स्टडी टूर का उद्देश्य
सात दिनों के इस स्टूडी टूर के दौरान पार्षद वहां के नगर निकायों द्वारा अपनाए जा रहे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम और आईटी आधारित नागरिक सुविधाओं का अध्ययन करेंगे। मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह और नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के बीच तनातनी के बीच पार्षद स्टडी टूर पर रवाना हुए। हालांकि इस टूर का भविष्य में नगर निगम को कितना लाभ मिल जाएगा, इस पर संशय है।
पिछले 2 स्टडी टूर को लिया जाए तो एक भी पार्षद ने टूर में क्या सीखा और शहर में उसका असर दिखना चाहिए। इसकी कोई भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की। अगर वर्ष 2021 के टूर की बात की जाए तो 83 पार्षदों के सैर सपाटे पर 34.89 लाख रुपये खर्च हुए थे। पार्षदों का टूर अंडमान और निकोबार द्वीप गया था। वहां से लौटकर आए एक भी पार्षद ने अपनी रिपोर्ट निगम कार्यालय में जमा नहीं की। कुछ यही स्थिति 2024 में मुंबई गए टूर में रही। टूर में 74 पार्षद गए थे। इसमें 31.77 लाख रुपये खर्च हुए थे। नाम न छापने की शर्त पर भाजपा पार्षद ने बताया कि वर्ष 2021 के टूर में काफी विवाद हुआ था। इसके चलते तीन साल तक टूर नहीं गया। कई पार्षदों ने ड्रामा किया था। यह है टूर का उद्देश्य
पार्षदों को स्टडी टूर पर ले जाने का उद्देश्य संबंधित शहर के नगर निगम या फिर स्थानीय निकाय में हो रहे अच्छे कार्य की जानकारी करना है। इन कार्यों को आगरा में कितना लागू किया जा सकता है। इस पर बिंदुवार रिपोर्ट तैयार करनी होती है। बैठक में अपने अनुभवों को साझा करना पड़ता है। इससे प्लानिंग में मदद मिलती है। मनोनीत पार्षद नहीं जा सके टूर पर
हाल ही में मनोनीत हुए 10 पार्षद टूर पर नहीं जा सके। इसका तकनीकी पेंच यह है कि इन सदस्यों का अभी तक शपथ ग्रहण नहीं हो सका है, जिससे वह नियमानुसार सदन का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। इसके चलते वे टूर पर नहीं जा सके।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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