इटावा के उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में मानसिक रूप से अक्षम महिला से दुष्कर्म के मामले की जांच निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी पीड़िता का न्यायालय में बयान दर्ज कराना, क्योंकि वह बोलने, सुनने और सामान्य रूप से समझने में अक्षम है। इस चुनौती को पार करने के लिए कानपुर से दो सदस्यीय विशेषज्ञ टीम बुलाई गई। इसमें एक महिला और एक पुरुष विशेषज्ञ शामिल थे। उन्होंने पीड़िता के हाव-भाव, संकेत और मानसिक स्थिति को समझते हुए न्यायालय में उसका पक्ष दर्ज कराने में अहम भूमिका निभाई। इसी प्रक्रिया के बाद धारा 164 के तहत बयान दर्ज हो सका, जो अब जांच का सबसे मजबूत आधार बन गया है। धारा 164 का बयान बना अहम साक्ष्य पुलिस अधिकारियों के अनुसार, न्यायालय में दर्ज किया गया धारा 164 का बयान पूरे मामले में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। यह बयान अदालत में मजबूत साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाता है। इस आधार पर पुलिस अब आगे की कार्रवाई को और सटीक दिशा में आगे बढ़ा सकती है। साथ ही, इससे पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में मदद मिलेगी और आरोपी के खिलाफ केस और मजबूत होगा। डीएनए जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर जोर पुलिस पहले ही पीड़िता और आरोपी के डीएनए नमूने विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज चुकी है। धारा 164 का बयान दर्ज होने के बाद जांच और भी पुख्ता हो गई है। विवेचना से जुड़े अधिकारी पूरे मामले को वैज्ञानिक और कानूनी साक्ष्यों के आधार पर मजबूत करने में जुटे हैं। पुलिस हर छोटे से छोटे तथ्य को जोड़कर एक बेहतरीन केस तैयार करने की कोशिश कर रही है। कार्यपरिषद की बैठक में तय होगी कार्रवाई विश्वविद्यालय प्रशासन ने 28 मार्च को कार्यपरिषद की बैठक बुलाई है। इस बैठक में 9 सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई और किन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले पर पूरे जिले और प्रदेश की नजरें टिकी हैं। कैसे सामने आया पूरा मामला मानसिक रोग विभाग में 14 जून 2025 को करीब 38 वर्षीय अज्ञात महिला को भर्ती कराया गया था। वह बोलने, सुनने और समझने में अक्षम थी और लंबे समय से उपचाराधीन थी। 17 मार्च 2026 को रूटीन जांच के दौरान पता चला कि महिला करीब पांच माह की गर्भवती है। इस गंभीर स्थिति के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आरोपी की गिरफ्तारी और शुरुआती कार्रवाई प्रारंभिक जांच में सफाई कर्मी रविंद्र कुमार बाल्मीकि, निवासी लखना, थाना बकेवर, जनपद इटावा को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। विभागाध्यक्ष को हटा दिया गया और संबंधित वार्ड में तैनात एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों को भी हटाया गया। इसके अलावा पूरे मामले की जांच के लिए 9 सदस्यीय समिति गठित की गई।

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