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सोनभद्र के खनन टेंडर में धांधली का आरोप:ठेकेदार बोले- दस्तावेज गायब करके मनचाही फर्म को पट्टा दिया; हाईकोर्ट ने रोक लगाई

सोनभद्र में खनन को लेकर पिछले महीने हुई टेंडर प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। आरोप है कि प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर खनन पट्टे आवंटित किए गए। जिस पट्‌टे के लिए 1051 रुपए/घन मीटर की बोली लगी थी, उसे दस्तावेजों में हेरफेर करके 207 रुपए/घन मीटर में आवंटित कर दिया गया। पूरे मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला… सबसे पूरा मामला समझिए… जिले में निजी भूमि के 10 खनन क्षेत्रों को 10 साल तक पट्टे पर देने के लिए 12 जनवरी, 2026 को टेंडर निकाला गया था। टेंडर भरने की ऑनलाइन प्रक्रिया 16 फरवरी सुबह 10 बजे से 23 फरवरी शाम 5 बजे तक चली। प्रक्रिया में 47 लोगों ने हिस्सा लिया। ऑनलाइन टेंडर की हार्ड कॉपी 24 फरवरी को सुबह 11:30 बजे ऑफिस में जमा करनी थी। आरोप है कि हार्ड कॉपी से कुछ दस्तावेज जानबूझकर गायब कर दिए गए और इसी आधार पर कई फर्मों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। 207 रुपए/घन मीटर बोली लगाने वाले को मिला टेंडर खनन कारोबारी और कांत कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक श्रीकांत दुबे ने मामले में डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत की। शिकायती पत्र में उन्होंने लिखा कि सोनभद्र की ओबरा तहसील के बिल्ली मारकुंडी में 1.820 हेक्टेयर के लिए छह टेंडर आए थे। खनन सिंडिकेट को फायदा पहुंचाने के लिए अधिकारियों ने ज्यादा बोली लगाने वाली तीन फर्मों के दस्तावेज नष्ट करके उन्हें प्रक्रिया से बाहर कर दिया। जिस इलाके में पत्थर का रेट उनकी फर्म 1051 रुपए/घन मीटर दे रही थी, उसका पट्टा 207 रुपए/घन मीटर की बोली लगाने वाली फर्म मां दुर्गा मानिंग वर्क्स को दे दिया गया। इसी तरह जिस इलाके में 333 रुपए/घन मीटर की बोली लगी थी, उसे 201 और 202 रुपए/घन मीटर में दे दिया गया। हाईकोर्ट ने पहली सुनवाई में ही लगाई रोक श्रीकांत दुबे ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिक लगाई। याचिका में पत्थर के खनन पट्टों में हो रही धांधली और अनियमितता की वजह से हुए करोड़ों रुपए के राजस्व के नुकसान के बारे में सवाल उठाए गए। 23 मार्च को मामले की पहली सुनवाई हुई। इसमें हाईकोर्ट ने कम रेट देने वाली कंपनियों के वर्क ऑर्डर पर रोक लगा दी। इसका ऑर्डर 26 मार्च को अपलोड किया गया। मामले की अगली सुनवाई 31 मार्च को होगी। अब जानिए, कैसे काम करता है सिंडिकेट
सोनभद्र में खनन सिंडिकेट के काम करने के तरीके अलग-अलग हैं। पट्‌टा किसी गरीब व्यक्ति के नाम पर लिया जाता है, लेकिन संचालन सिंडिकेट के प्रभावशाली लोगों करते हैं। इसमें खनन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत रहती है। खनन अधिकारी, सर्वेयर, इंस्पेक्टर पर आरोप लगते हैं कि वे डिस्पैच स्लिप या परमिट फर्जी तरीके से जारी करते हैं। अवैध खनन को नजरअंदाज किया जाता है और नियमों की अनदेखी होती है। कई बार पट्टे में आवंटित इलाके से बाहर या अतिरिक्त मात्रा में खनन किया जाता है। CAG रिपोर्ट में भी हो चुका है धांधली का खुलासा पिछले साल विधानसभा में पेश CAG रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर सरकारी राजस्व के नुकसान का खुलासा हो चुका है। रिपोर्ट में साईंराम इंटरप्राइजेज और सीएस इंफ्रा कंस्ट्रक्शन पर अवैध खनन करके 172 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाने का जिक्र किया गया था। —————————————— ये खबर भी पढ़ें… चंदौली SDM की मां बोलीं- अफसर बहू ने तेजाब फेंका:40 लाख के जेवर ले गई; कहती थी- सास-ससुर को वृद्धाश्रम भेज दो चंदौली में SDM पति-पत्नी अनुपम मिश्रा और दिव्या ओझा का घरेलू विवाद उलझता जा रहा है। दिव्या के पिता ने एफआईआर में अनुपम पर नपुंसक होने के आरोप लगाए हैं। SDM अनुपम मिश्रा की मां शशि मिश्रा से दैनिक भास्कर ने बात की। इस दौरान शशि मिश्रा ने कई चौंकाने वाले दावे किए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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