चैत्र नवरात्रि के अवसर पर स्वामी हरिनारायण समदर्शी महाराज के नेतृत्व में आयोजित नौ दिवसीय अखंड सतचंडी अनुष्ठान संपन्न हो गया है। यह अनुष्ठान प्रयागराज के अरैल स्थित तपोस्थली आश्रम, पुणे (महाराष्ट्र) और चित्रकूट स्थित सिद्धेश्वर पुरुषार्थ दंडी स्वामी बालक आश्रम में एक साथ आयोजित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य विश्व शांति और मानव कल्याण था। नवरात्रि के नवम दिवस पर नवमी एवं दशमी तिथि के विशेष मंत्रोच्चार के साथ दशांश पाठ पूर्ण कर इस अनुष्ठान का विधिवत समापन किया गया। इस दौरान विश्व शांति, मानव कल्याण और समस्त जीवों के मंगल की कामना की गई।
स्वामी हरिनारायण समदर्शी महाराज ने बताया कि यह अनुष्ठान केवल मां भगवती की आराधना तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे विश्व में शांति और एकता स्थापित करना भी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव और युद्ध की स्थितियों को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रार्थना और आध्यात्मिक साधना आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से ईरान, अमेरिका और इजराइल जैसे देशों के बीच जारी तनाव का उल्लेख करते हुए विश्व में शांति की कामना की। स्वामी जी ने कहा कि सनातन धर्म सदैव अखंडता, एकता और मानवता के कल्याण का संदेश देता है, और ऐसे अनुष्ठान उसी भावना को मजबूत करते हैं। अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं ने पूरी आस्था और भक्ति के साथ भाग लिया। मंत्रोच्चार, हवन और पूजा-अर्चना के माध्यम से वातावरण भक्तिमय बना रहा। समापन अवसर पर स्वामी हरिनारायण समदर्शी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं को मां भगवती का आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि आदिशक्ति जगत जननी मां भगवती की कृपा से ही विश्व में सुख, शांति और समृद्धि संभव है। उन्होंने सभी से निष्काम भाव से सेवा और साधना में लगे रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन ‘जय मां भगवती’ के जयघोष के साथ हुआ, जिसमें एक बार फिर विश्व कल्याण की कामना की गई।

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