लोकसभा में मेरठ-हापुड़ क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा उठाया गया है। मेरठ लोकसभा सांसद अरुण गोविल ने प्रश्नकाल के दौरान नियम 377 के तहत पश्चिम उत्तर प्रदेश में बढ़ते कैंसर और किडनी रोगों के मामलों को देखते हुए मेरठ-हापुड़ क्षेत्र में एम्स की स्थापना की मांग की। सांसद अरुण गोविल ने बताया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश का मेरठ-हापुड़ क्षेत्र भौगोलिक और जनसंख्या की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां बड़ी संख्या में लोग दूर-दराज के क्षेत्रों से आकर बसे हैं, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में यह क्षेत्र अभी भी पिछड़ा हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से कैंसर और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की। लोगों को होती है परेशानी उन्होंने संसद में कहा कि इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों को समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाता, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है। कई बार इलाज में देरी मरीजों की जान के लिए भी खतरा बन जाती है। इसके कारण मरीजों और उनके परिजनों को मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सांसद ने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान में इस क्षेत्र के मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली स्थित एम्स पर निर्भर रहना पड़ता है। दिल्ली एम्स में पहले से ही अत्यधिक दबाव होने के कारण मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। आसपास के जिलों को भी मिलेगा लाभ उन्होंने केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की कि मेरठ-हापुड़ क्षेत्र में एम्स जैसे उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थान की स्थापना की जाए। इसके साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि यहां के मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्नत बनाया जाए। इससे स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी और आसपास के जिलों के लाखों लोगों को लाभ मिलेगा। सांसद गोविल ने सरकार से अपील की कि क्षेत्र की स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाए। ताकि लोगों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सके।

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