प्रयागराज में सपा नेता मोहम्मद मुजफ्फर को अदालत से झटका लगा है। गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामले में उनकी दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी गई है। मुजफ्फर पर गौ तस्करी का आरोप है और उन्हें माफिया अतीक अहमद का करीबी बताया जाता है। गैंगस्टर कोर्ट के स्पेशल जज सिद्धार्थ कुमार वाघव ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने विशेष लोक अभियोजक गुलाब चंद्र अग्रहरि और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया।
मोहम्मद मुजफ्फर कौड़िहार ब्लॉक के प्रमुख हैं और समाजवादी पार्टी से संबंधित हैं। उनके खिलाफ कुल 35 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें गंभीर धाराओं के मामले शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गैंगस्टर चार्ट में उनके खिलाफ दो प्रमुख अपराध दर्ज हैं और उन्हें गो तस्करी से जुड़े एक संगठित गिरोह का सरगना बताया गया है। मुजफ्फर पिछले लगभग एक वर्ष से जेल में बंद हैं और वर्तमान में फतेहगढ़ जेल में हैं। जेल में रहते हुए भी उन्होंने ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जीता था, जो उस समय काफी सुर्खियों में रहा था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी का आपराधिक इतिहास लंबा और गंभीर है, जिससे समाज में कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह भी तर्क दिया गया कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है, तो वह साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है या गवाहों पर दबाव बना सकता है। बचाव पक्ष ने जमानत देने की मांग करते हुए विभिन्न आधार प्रस्तुत किए। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद मोहम्मद मुजफ्फर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। यह निर्णय जिले में अपराध और राजनीति के गठजोड़ को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

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