भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सांसद जगदंबिका पाल ने शुक्रवार को लोकसभा में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में ‘केन्द्रित बौद्ध अध्ययन केंद्र’ स्थापित करने की मांग की। उन्होंने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया और संस्कृति मंत्रालय से विशेष वित्तीय सहायता तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया। सांसद पाल ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह वह भूमि है जहां प्राचीन कपिलवस्तु स्थित था और जहां गौतम बुद्ध ने अपने जीवन के शुरुआती 29 वर्ष बिताए थे। उन्होंने पिपरहवा में मिले बौद्धकालीन पुरातात्विक अवशेषों का भी जिक्र किया, जिससे यह क्षेत्र वैश्विक बौद्ध अध्ययन, शोध और सांस्कृतिक संवाद का केंद्र बन सकता है। बौद्ध शिक्षा और अनुसंधान को गति जगदंबिका पाल ने बताया कि केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से बौद्ध अध्ययन और सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है। लेह में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ बौद्ध स्टडीज और नालंदा में नवा नालंदा महाविहार जैसे संस्थानों को मिले सहयोग से देश में बौद्ध शिक्षा और अनुसंधान को गति मिली है। उन्होंने इन्हीं संस्थानों की तर्ज पर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में भी एक उच्च स्तरीय ‘केन्द्रित बौद्ध अध्ययन केंद्र’ स्थापित करने की वकालत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित केंद्र केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं होगा, बल्कि यह बौद्ध इतिहास, दर्शन, प्राचीन भाषाओं, पुरातत्व, संस्कृति और आधुनिक बौद्ध कूटनीति के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर का शोध एवं अध्ययन केंद्र बन सकता है। इससे देश-विदेश के छात्र, शोधकर्ता और विद्वान सिद्धार्थनगर की ओर आकर्षित होंगे, जिससे क्षेत्र का शैक्षणिक और सांस्कृतिक महत्व बढ़ेगा।

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