प्रयागराज में प्रयाग संगीत समिति के 86वें ‘अखिल भारतीय संगीत सम्मेलन’ की दूसरी सांस्कृतिक संध्या भक्ति और शास्त्रीय कला को समर्पित रही। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पद्मश्री अनूप जलोटा रहे, जिनकी प्रस्तुति ने सभागार में मौजूद श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर अनूप जलोटा ने जैसे ही अपने प्रसिद्ध भजन “ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन…” के सुर छेड़े, पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद उन्होंने “तेरे मन में राम, तन में राम…” प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अनूप जलोटा की सहज गायकी और श्रोताओं से संवाद ने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया।
अनूप जलोटा ने संगीत के क्षेत्र में करियर बनाने वाले उभरते कलाकारों को सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में शॉर्टकट का चलन बढ़ रहा है, लेकिन संगीत की दुनिया में टिके रहने के लिए शास्त्रीय संगीत की नींव मजबूत होना अनिवार्य है। उन्होंने युवाओं से रियाज और गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान करने का आग्रह किया। भजनों से पहले कार्यक्रम की शुरुआत कोलकाता की विदुषी अंजना नाथ के शास्त्रीय गायन से हुई। उन्होंने अपनी गंभीर गायकी से शाम का प्रभावशाली आगाज किया। उनके साथ परिमल चक्रवर्ती ने तबले पर और सुब्रतो भट्टाचार्य ने हारमोनियम पर संगत दी। इसके बाद दिल्ली के सुप्रसिद्ध बांसुरी वादक चेतन जोशी ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर मनोज कुमार श्रीवास्तव ने उनका साथ दिया। वहीं, कोलकाता की मधुमिता राय मिश्रा ने कथक नृत्य के माध्यम से मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस आयोजन के दौरान समिति के सचिव अरुण कुमार, उपाध्यक्ष हर्षित कुमार और रजिस्ट्रार प्रदीप कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन नवीन सिन्हा ने किया।

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