बलिया में धार्मिक और पर्यटन विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से “महर्षि भृगु कॉरिडोर” के निर्माण की योजना तैयार की गई है। लगभग 65 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना 10,520 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में विकसित होगी, जो पवित्र गंगा नदी को ऐतिहासिक ददरी मेला क्षेत्र से जोड़ेगी। यह कॉरिडोर विशेष रूप से श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। भृगु मंदिर क्षेत्र में हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर 5 लाख से अधिक श्रद्धालु गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। वहीं, ददरी मेले के दौरान यह संख्या 50 लाख के पार पहुंच जाती है। गुरु पूर्णिमा, दीपावली और होली जैसे प्रमुख त्योहारों पर भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। कॉरिडोर बनने से इन सभी को बेहतर आवागमन और सुविधाएं मिल सकेंगी। परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए मुख्य राजस्व अधिकारी त्रिभुवन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। इस समिति ने भृगु कमेटी, चित्रगुप्त कमेटी और स्थानीय पुजारियों के साथ बैठक कर महत्वपूर्ण सुझाव लिए हैं। समिति में नगर मजिस्ट्रेट, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता, सदर उपजिलाधिकारी और नगर पालिका परिषद बलिया के अधिशासी अधिकारी शामिल हैं। कॉरिडोर का आर्किटेक्ट प्लान तैयार हो चुका है। नगर पालिका की परिसंपत्तियों और विद्युत विभाग के शिफ्टिंग खर्च का आकलन भी कर लिया गया है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब 65 करोड़ रुपये है, जिसमें लगभग 5 करोड़ रुपये परिसंपत्ति अधिग्रहण पर खर्च किए जाएंगे। इस प्रस्ताव को पर्यटन विभाग के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा। परियोजना के लिए बजट का प्रावधान शासन स्तर पर किया जा चुका है। इसमें परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। महर्षि भृगु कॉरिडोर के निर्माण से बलिया को एक नई धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान मिलेगी। यह परियोजना न केवल आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देगी।

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