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रिपोर्ट-पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमान छिपाने में मदद की:अमेरिकी हमलों से बचाने नूर खान एयरबेस पर रखा, PAK ने आरोपों को नकारा
पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर जगह दी। यह दावा CBS न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि अप्रैल में सीजफायर के ऐलान के कुछ दिन बाद ईरान ने कई विमान पाकिस्तान एयरफोर्स के नूर खान एयरबेस भेजे। यह एयरबेस रावलपिंडी के पास स्थित पाकिस्तान का अहम सैन्य ठिकाना माना जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भेजे गए विमानों में ईरानी एयरफोर्स का RC-130 विमान भी शामिल था। यह लॉकहीड C-130 हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का खुफिया और निगरानी मिशन वाला वर्जन माना जाता है। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रिपोर्ट में किए गए दावों को खारिज किया। CBS न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि नूर खान एयरबेस शहर के बीच में स्थित है और वहां बड़ी संख्या में विमान छिपाना संभव नहीं है।
दावा- ईरान ने कुछ प्लेन अफगानिस्तान भी भेजे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने कुछ नागरिक विमान अफगानिस्तान भी भेजे। एक अफगान सिविल एविएशन अधिकारी ने दावा किया कि माहान एयर का एक विमान युद्ध शुरू होने से पहले काबुल पहुंचा था। ईरानी एयरस्पेस बंद होने के बाद वह विमान काबुल एयरपोर्ट पर ही रुका रहा। मार्च में पाकिस्तान और तालिबान सरकार के बीच तनाव बढ़ने पर काबुल एयरपोर्ट पर हमले की आशंका बनी। इसके बाद तालिबान के सिविल एविएशन अधिकारियों ने माहान एयर के विमान को सुरक्षा कारणों से ईरान सीमा के पास हेरात एयरपोर्ट भेज दिया। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने अफगानिस्तान में ईरानी विमानों की मौजूदगी से इनकार किया। ईरान और चीन को नाराज नहीं करना चाहता पाकिस्तान पाकिस्तान एक तरफ खुद को अमेरिका के सामने मध्यस्थ और स्थिरता लाने वाले देश के रूप में पेश कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ वह ईरान और चीन को नाराज करने से बचने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले दशक में पाकिस्तान की चीन पर सैन्य निर्भरता काफी बढ़ी है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक स्टडी के मुताबिक 2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान के 80% बड़े हथियार चीन ने सप्लाई किए। पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत हुई थी। 21 घंटे तक यह वार्ता चलने के बावजूद नाकाम हो गई थी। दोनों के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। ईरान ने रविवार को पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक प्रस्ताव सौंपा था, जिसे ट्रम्प ने पूरी तरह खारिज कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव में युद्ध खत्म करने, फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने, प्रतिबंध हटाने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की बात कही गई थी। अमेरिका ने एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने की शर्त रखी अमेरिका ने इस हफ्ते ईरान को 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था। इसके तहत ईरान को कम से कम 12 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकना होगा और अपने पास मौजूद करीब 440 किलो 60% एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा। इसके बदले अमेरिका प्रतिबंधों में ढील देगा, ईरान की फ्रीज की गईं अरबों डॉलर की संपत्तियां छोड़ेगा, साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम पर पूरी तरह समझौता करने को तैयार नहीं है।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
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