बेंच ने कहा, ‘नैतिकता और कानून को अलग रखना होगा। यदि किसी चीज को कानून में अपराध नहीं माना गया है तो फिर तो फिर नैतिकता और समाज की राय हमारे फैसले को प्रभावित नहीं कर सकते हैं। अदालत का यह कर्तव्य है कि वह नागरिक के सुरक्षा के अधिकार की रक्षा करे।’
बेंच ने कहा, ‘नैतिकता और कानून को अलग रखना होगा। यदि किसी चीज को कानून में अपराध नहीं माना गया है तो फिर तो फिर नैतिकता और समाज की राय हमारे फैसले को प्रभावित नहीं कर सकते हैं। अदालत का यह कर्तव्य है कि वह नागरिक के सुरक्षा के अधिकार की रक्षा करे।’
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