श्रावस्ती में चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर श्रद्धा और आस्था का विशेष माहौल देखा गया। दुर्गा नवमी के अवसर पर भिन्गा स्थित प्राचीन काली माता मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कन्या पूजन, कन्या भोज और हवन कर माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह मंदिर हजारों वर्ष पुराना माना जाता है, और ऐसी मान्यता है कि यहां पूजा-अर्चना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जिले भर में नवरात्रि के नौवें दिन देवी उपासकों ने अपने घरों और समीपवर्ती देवी मंदिरों में 108 देवियों के नाम से आहुतियां दीं। इस दौरान देश और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की गई। हवन के समय “ॐ दुर्गायै नमः स्वाहा” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। सीताद्वार, कटरा के काली माता मंदिर, बाइपास स्थित दुर्गा मंदिर और ओडाझार के समय माता मंदिर सहित अन्य देवी स्थलों पर हवन कराने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। नवरात्रि के समापन पर अष्टमी से शुरू हुआ कन्या भोज नवमी को भी जारी रहा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि व्रत और अनुष्ठान का समापन कन्या पूजन एवं कन्या भोज के साथ ही पूर्ण होता है। कन्याओं को साक्षात देवी का रूप मानकर उनकी पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, नवरात्रि शक्ति उपासना का पर्व है। शक्ति के बिना किसी भी बड़े कार्य की सिद्धि संभव नहीं मानी जाती। वर्ष में दो बार आने वाली नवरात्रि—शारदीय और चैत्र—का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। चैत्र नवरात्रि देवी दुर्गा की आराधना, बुराई पर अच्छाई की विजय और नववर्ष के शुभारंभ का प्रतीक मानी जाती है। नवमी के इस पावन अवसर पर पूरे जनपद में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा। भक्तों ने माँ दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

Leave a Reply