इटावा में अवैध मिट्टी खनन का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सदस्य रामगोपाल यादव द्वारा राज्यसभा में उठाया गया मुद्दा अब जिले में चर्चा का केंद्र बन गया है। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा था कि यह केवल स्थानीय नहीं बल्कि बड़ा पर्यावरणीय संकट है। अब इस बयान के बाद जिले भर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। हरित क्षेत्र और पहाड़ियों के खत्म होने का आरोप राज्यसभा में प्रो. रामगोपाल यादव ने इटावा शहर से चंबल नदी की ओर जाने वाले मार्ग का जिक्र करते हुए बताया कि सड़क के दोनों ओर स्थित पहाड़ियों और हरित क्षेत्र को खनन माफिया तेजी से खत्म कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों एकड़ वन विभाग की जमीन पर अवैध खनन कर प्लॉटिंग की जा रही है। जबकि वह भूमि वन क्षेत्र की है। यमुना नदी और चंबल के बीच का यह इलाका कभी प्राकृतिक रूप से समृद्ध था, लेकिन अब यहां का पर्यावरण लगातार बिगड़ता जा रहा है। सांस्कृतिक विरासत पर असर उन्होंने इटावा से जुड़े प्रसिद्ध कवि गोपाल दास नीरज और शिशुपाल सिंह शिशु का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र केवल प्राकृतिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। आज उसी धरती को अवैध खनन के जरिए नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे इसकी पहचान और विरासत दोनों पर खतरा पैदा हो गया है। प्रो रामगोपाल ने कवि शिशुपाल शिशु के चंबल काव्य खंड में इस क्षेत्र पर लिखी हुई कविता को सदन में दोहराया कई क्षेत्रों में जारी खनन प्रो. यादव ने यह भी आरोप लगाया कि अवैध खनन और जमीनों पर कब्जे में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जमीनों पर कब्जा करने में लगभग 90 प्रतिशत सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और 10 प्रतिशत समाजवादी पार्टी के लोग भी शामिल हैं। उन्होंने इकदिल, बसरेहर, वैदपुरा और सिविल लाइन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खनन और मिट्टी के परिवहन की बात कही।

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