चैत्र नवरात्र के नौवें दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा का पूजन कर कन्या-लांगुरों को भोजन कराया और अपने व्रत खोले। पंडित कैलाश नरेंद्र शर्मा के अनुसार, नवमी का व्रत नहीं रखने पर पूजा पूरी नहीं मानी जाती है। कन्या पूजन सुबह 10:06 बजे से पहले करना शुभ माना गया है। नगर के मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मां महाकाली मंदिर, शीतलगंज देवी मंदिर, साठा स्थित देवी मंदिर, राज राजेश्वर मंदिर, भवन मंदिर, नर्मदेश्वरधाम मंदिर और मनसा देवी मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में माता रानी का पूजन दोपहर बाद तक जारी रहा। श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े होकर दर्शन का इंतजार करते दिखे। इसी तरह अहार के मां अवंतिका देवी मंदिर और नरौरा क्षेत्र के गांव बेलोन स्थित सर्व मंगला भवानी मंदिर में भी भक्तों की भीड़ उमड़ी। अनूपशहर, औरंगाबाद, शिकारपुर, बीबीनगर, गुलावठी, स्याना, ऊंचागांव, खानपुर और डिबाई जैसे क्षेत्रों में भी भक्तों ने कंजक पूजन कर अपने व्रत संपन्न किए। नगर से लेकर देहात तक घरों और मंदिरों में माता रानी के जयकारों की गूंज सुनाई दी। चैत्र नवरात्र के दौरान घरों में भी कंजक पूजन का आयोजन किया गया। गली-मोहल्लों में नन्ही बालिकाएं एक घर से दूसरे घर भोजन के लिए पहुंचीं, जहां महिलाओं ने विधिवत पूजन कर उन्हें भोजन कराया। व्रत रखने वाली महिलाओं ने बताया कि नवरात्र के दौरान संकल्प लेकर घट स्थापना की गई थी, जिसका अनुष्ठान नवमी पर कंजक भोजन कराकर पूरा किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि नवरात्र में माता के पूजन का विशेष महत्व है। कई भक्तों ने अहार, अनूपशहर, कर्णवास और नरौरा सहित विभिन्न घाटों पर गंगा स्नान कर पुण्य अर्जित किया।

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