कन्नौज में एक कार्यक्रम में अफसरों के न पहुंचने से नाराज मंत्री ने अब पत्र लिखकर डीएम को हिदायत दी है। उन्होंने नाराजगी भी जताई और भविष्य में अनुशासन बनाए रखने को कहा। उधर इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी टिप्पणियां होने लग गईं। यूपी सरकार के 9 साल पूरे होने पर पुरातत्व संग्रहालय स्थित रोमा स्मारक पर डिस्कवर योर रूट्स कार्यक्रम में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण को मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होना था। यहां वह समय से 15 मिनट पहले पहुंच गए, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर अधिकारी मौजूद नहीं थे। ऐसे में मंत्री असीम अरुण अपनी पार्टी के नेताओं के साथ 45 मिनट तक पब्लिक के बीच बैठकर अधिकारियों का इंतजार करते रहे। जब कोई अधिकारी वहां नहीं पहुंचा तो कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही वह नाराज होकर कार्यक्रम स्थल से चले गए। उनके साथ ही पार्टी के सभी नेता भी चले गए। इस मामले को लेकर देर रात मंत्री असीम अरुण ने डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री के नाम पत्र लिखा। जोकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पत्र में उन्होंने लिखा- “प्रिय श्री अग्निहोत्री जी,
मैं अत्यंत खेद के साथ आपका ध्यान रोमा स्मारक पर आज आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई अव्यवस्था की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। मुझे इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शाम 5:30 बजे आमंत्रित किया गया था। एक अनुशासित नागरिक होने के नाते, मैं नियत समय पर वहां पहुंचा किंतु, वहां का अनुभव शिष्टाचार और समयशीलता के बिल्कुल विपरीत रहा। मुख्य आयोजक, सुश्री वैशाली (एस.डी.एम.), मेरे पहुंचने के 15 मिनट बाद आई, जिसके बाद ए.डी.एम. का आगमन हुआ। मैंने लगभग 45 मिनट तक कार्यक्रम शुरू होने का इंतजार किया। इस दौरान मंच से घोषणा की जाती रही कि कार्यक्रम आपके आगमन के उपरांत शुरू होगा। आप सहमत होंगे कि यह स्थिति मेरे लिए असहज हो गई। आप कब तक आएंगे यह भी किसी को नहीं पता था। अतः, मेरे पास प्रस्थान करने के अतिरिक्त कोई विकल्प न बचा। एक लोक सेवक के रूप में, हमें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की कार्यशैली से प्रेरणा लेनी चाहिए, जो समय की पाबंदी और अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। अतः आपसे अपेक्षा है कि भविष्य में यह सुनिश्चित किया जाए कि आपके और आपकी टीम द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में समय की गरिमा बनी रहे। अनुशासन ही प्रशासन की नींव है, और मैं अपनी टीम से भी उसी समयबद्धता की उम्मीद रखता हूँ जिसका मैं स्वयं पालन करता हूँ।” मंत्री असीम अरुण का ये पत्र सामने आने के बाद लोगों के बीच चर्चा है कि जल्द ही जिले के अधिकारियों पर कार्यवाही की गाज गिर सकती है। हालांकि इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। कुछ भाजपा कार्यकर्ता इसे मंत्री का अपमान बताकर आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं तो कुछ कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि जब कोई कार्यकर्ता मंत्री के पास शिकायत लेकर पहुंचता है तो अफसरों से बात करने की वजाय उस कार्यकर्ता को ही गलत ठहरा दिया जाता। अब परिणाम सामने है।

Leave a Reply