मिर्जापुर। उत्तर मध्य रेलवे ने चोपन-चुनार रेल खंड पर स्थित दो महत्वपूर्ण पुराने पुलों, ब्रिज संख्या 48 और ब्रिज संख्या 46, का नवीनीकरण कार्य पूरा कर लिया है। इस कार्य के साथ ही प्रयागराज मंडल के ओआरएन-2 श्रेणी के गंभीर मरम्मत योग्य सभी पुलों का उन्नयन भी पूरा हो गया है, जिससे इस रूट पर ट्रेनें अब अधिक गति से दौड़ सकेंगी। वर्ष 1953 में निर्मित 8 स्पैन वाला ब्रिज संख्या 48 अपनी जर्जर स्थिति के कारण ओआरएन-2 श्रेणी में था। रेलवे ने 12 मार्च से 20 मार्च 2026 के बीच एक विशेष अभियान चलाकर रिकॉर्ड समय में इसके सभी स्पैन बदल दिए। इस दौरान पुराने ब्रॉड गेज लोडिंग गर्डर्स को हटाकर आधुनिक 25 टन क्षमता वाले वेल्डेड स्टील प्लेट गर्डर और एच-बीम स्टील स्लीपर लगाए गए। साथ ही, पुल के खंभों की कंक्रीट जैकेटिंग कर इसकी मजबूती और आयु बढ़ाई गई। इसी क्रम में, 6 स्पैन वाले ब्रिज संख्या 46 का नवीनीकरण भी पूरा किया गया। यह पुल भी पुराने मानकों पर आधारित था, जिससे ट्रेनों की गति पर प्रतिबंध लगा रहता था। अब इसमें भी आधुनिक स्टील गर्डर लगाए जाने के बाद भारी मालगाड़ियों और तेज गति की ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा। इन दोनों पुलों पर पहले सुरक्षा कारणों से 30 किमी प्रति घंटा की गति सीमा लागू थी, जिसे अब हटा दिया जाएगा। इससे ट्रेनों के समय में सुधार होगा और माल ढुलाई क्षमता भी बढ़ेगी। इन पुलों की संरचना अब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो गई है। महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने इस जटिल कार्य को समयबद्ध और सुरक्षित तरीके से पूरा करने के लिए इंजीनियरों और कर्मचारियों की सराहना की। यह कार्य मंडल रेल प्रबंधक रजनीश अग्रवाल के मार्गदर्शन में उप मुख्य ब्रिज इंजीनियर आई.पी.एस. यादव और उनकी टीम द्वारा पूरा किया गया। रेल मंत्रालय के ‘मिशन रफ्तार’ के तहत किए गए इस कार्य से न केवल रेल संचालन तेज और सुरक्षित होगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास और लॉजिस्टिक क्षमता को भी नई मजबूती मिलेगी।

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