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कारगिल हीरो दीपचंद को प्रेमानंद महाराज ने किया सैल्यूट:हिसार के पूर्व सैनिक से संत बोले-आपके दर्शन से सुख मिला; ब्लास्ट में दोनों हाथ-पैर गंवाए थे

हरियाणा में हिसार के गांव पाबड़ा निवासी लांस नायक दीपचंद ने वृंदावन जाकर प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की है। प्रेमानंद महाराज ने दीपचंद को सबसे बड़ा संत बताया। दीपचंद को देखकर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आप जैसे वीर सैनिकों की बदौलत आज देश सुरक्षित है। सैनिक ही सही मायने में सबसे बड़ा संत होता है। प्रेमानंद महाराज को दीपचंद ने बताया कि कारगिल युद्ध में उनकी बलाटियन ने पाकिस्तानियों को छक्के छुड़ा दिए थे। युद्ध के दौरान हमने कह दिया था कि चाहे राशन ना मिले, मगर गोला बारूद जरूर मिलना चाहिए। दीपचंद ने बताया कि हमने करीब 10 हजार गोला बारूद दुश्मनों पर दागा था, जो आजतक एक रिकॉर्ड है। इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आप सही मायने में एक संत हैं। आपको देखकर ही मुझे अंदर से आनंद की अनुभूति हो रही है। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि हम हर सैनिक का संत की तरह सम्मान करते हैं। कारगिल हीरो के प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के कुछ PHOTO… दीपचंद बोले- मैं हर शहीद सैनिक घर जाता हूं
प्रेमानंद महाराज को पूर्व सैनिक दीपचंद ने बताया कि 26 साल पहले युद्ध हुआ था, मगर वे आज भी हर शहीद परिवार के घर जाते हैं और एक दीपक अपनी तरफ से परिवार को भेंट करके आते हैं। इसके लिए मैंने गाड़ी मोडिफिकेशन करवाई हुई है। इस पर प्रेमानंद महाराज ने हैरानी से कहा कि आप गाड़ी चला लेते हैं। दीपचंद ने कहा कि हां, मैं गाड़ी चला लेता हूं। इसके बाद दीपचंद ने प्रेमानंद महाराज को भी दीपक भेंट किया। जानिये कौन हैं दीपचंद, कैसे कारगिल युद्ध में लोहा मनवाया… ब्लास्ट में गवाएं दोनों पैर और एक हाथ कारगिल की लड़ाई में ऑपरेशन पराक्रम के बाद जब दीपचंद और सैनिक सामान बांध रहे थे तो इसी दौरान ब्लास्ट हो गया था। इस हादसे में दीपचंद का एक हाथ और दोनों पैर बुरी तरह जख्मी हो गए थे। उनको बचाने के लिए डॉक्टरों ने उनकी दोनों टांगे और एक हाथ को काट दिया था। उनका इतना खून बह गया था कि उन्हें बचाने के लिए 17 बोतल खून चढ़ाया गया। भले ही नायक दीपचंद के घुटने तक दोनों पैर नकली हैं, लेकिन आज भी वो एक फौजी की तरह तनकर खड़े होते हैं और दाहिने बाजू से फौजी सैल्यूट करते हैं। बटालियन को मिला था गैलेंटरी अवॉर्ड दीपचंद ने जंग के वक्त का एक किस्सा बताते हुए कहा जब मेरी बटालियन को युद्ध के लिए मूव करने का ऑर्डर मिल था, तब हम बहुत खुश हो गए थे। पहला राउंड गोला मेरी गन चार्ली-2 से निकला था तोलोलिंग पोस्ट पर और पहला ही गोला हिट हो गया था। हमने इस मूवमेंट में 8 जगह गन पोजिशन चेंज किया। हम अपने कंधों पर गन उठाकर लेकर जाते थे। हमारी बटालियन ने 10 हजार राउंड फायर किए। मेरी बटालियन को 12 गैलेंटरी अवॉर्ड मिला और हमें कारगिल जीतने का सौभाग्य मिला। —————————- ये खबर भी पढ़ें….. हरियाणा के कारगिल हीरो दीपचंद का फ्लाइट में सम्मान:कानपुर से मुंबई जा रहे थे, 35000 फुट ऊंचाई पर सुनाई शौर्यगाथा; दोनों पैर गंवा चुके हिसार जिले के कारगिल युद्ध के हीरो दीपचंद का फ्लाइट में सम्मान हुआ है। दीपचंद ने कारगिल युद्ध बहादुरी से लड़ा से था और इस युद्ध में अपने दोनों पैर गंवा दिए थे। हिसार के गांव पाबड़ा के रहने वाले लांसनायक दीपचंद ने कहा कि यह सम्मान पाकर वह गदगद है। ऐसा अनोखा सम्मान उनका कभी नहीं हुआ। (पूरी खबर पढ़ें)

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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