इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नगर निगम लखनऊ के वार्ड-73 फैजुल्लागंज से निर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को अब तक शपथ न दिलाए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने राज्य सरकार, नगर आयुक्त और महापौर से इस मामले में जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई के लिए 7 अप्रैल की तारीख तय की गई है। न्यायालय ने स्पष्ट टिप्पणी की है कि केवल प्रथम अपील लंबित होने के आधार पर किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को शपथ दिलाने से नहीं रोका जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने याची ललित तिवारी की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया। दरअसल, 19 दिसंबर 2025 को अपर सत्र न्यायाधीश ने वार्ड-73 के तत्कालीन पार्षद प्रदीप कुमार शुक्ला का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया था। इसके साथ ही, ललित तिवारी को निर्वाचित घोषित किया गया था। याचिका में कहा गया है कि इस आदेश के तीन महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई है। नगर निगम और महापौर की ओर से न्यायालय को बताया गया कि निचली अदालत के फैसले के खिलाफ प्रथम अपील लंबित है, जिसके कारण स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस पर याची पक्ष ने तर्क दिया कि नगर निगम अधिनियम की धारा 77 के तहत ऐसे आदेश का प्रभाव अगले दिन से स्वतः लागू हो जाता है। इसलिए, निर्वाचित पार्षद को शपथ दिलाना अनिवार्य है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया यह माना कि महापौर का रुख कानून के विपरीत प्रतीत होता है। कोर्ट ने इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा है। उल्लेखनीय है कि इस वार्ड में चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला को 4972 वोट मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के ललित तिवारी को 3298 वोट प्राप्त हुए थे। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि प्रदीप शुक्ला ने नामांकन पत्र में आवश्यक जानकारी नहीं दी थी, जो कदाचार की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर उनका निर्वाचन निरस्त किया गया था।

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