मिर्जापुर स्थित विंध्याचल धाम में धार्मिक परंपराओं के संरक्षण हेतु एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। श्रीविंध्य पण्डा समाज की व्यवस्थापिका समिति ने मंदिर परिसर में कृत्रिम पूजन सामग्री के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। समिति के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने बताया कि हाल के दिनों में माँ भगवती के पूजन और श्रृंगार में प्लास्टिक की चूड़ियां, कृत्रिम पुष्प और मोर पंख जैसी वस्तुओं का प्रयोग बढ़ गया था। उन्होंने इसे सनातन वैदिक परंपराओं के विपरीत और केवल दिखावे तक सीमित बताया, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। समिति के उपाध्यक्ष प्रहलाद मिश्र और मंत्री भानू पाठक सहित अन्य पदाधिकारियों की सहमति से यह तय हुआ है। अब किसी भी तीर्थ पुरोहित, पण्डा या पुजारी को कृत्रिम सामग्री का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। माँ के विग्रह के श्रृंगार में केवल पारंपरिक और प्राकृतिक पूजन सामग्री का ही प्रयोग अनिवार्य होगा। समिति ने सभी संबंधित पक्षों को इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। धार्मिक जानकारों ने इस फैसले को मंदिर की प्राचीन परंपराओं और सनातन संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। श्रद्धालुओं ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे आस्था की शुद्धता बनाए रखने की पहल कहा है।

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