मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह और नगर आयु्क्त खंडेलवाल के बीच की खींचतान और बढ़ती जा रही है। निंदा प्रस्ताव के बाद नगर निगम प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। 23 मार्च को मेयर की अध्यक्षता में हुई पार्षदों की बैठक के दौरान सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। इस दौरान नगर निगम में 10 से 15 संदिग्ध नजर आए थे। अब इनको चिह्नित किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि ये संदिग्ध किसी उपद्रव के इरादे से आए थे। इनके पास अवैध हथियार होने का भी अंदेशा है। सहायक अभियंता जीवेक की ओर से थाना हरीपर्वत में तहरीर तो दे ही दी गई है, अब नगर निगम प्रशासन भी सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी कर रहा है। पहले जानिये क्या था मामला?
23 मार्च को मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह की मौजूदगी में नगर निगम सदन में बैठक हुई थी। इस बैठक में नगर निगम के अधिकारी नहीं पहुंचे थे। इससे गुस्साए पार्षदों ने नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल और नगर निगम के अन्य अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया था। बैठक में अधिकारियों पर विकास कार्य न कराने का आरोप लगाया गया था।
इसके बाद नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी निंदा प्रस्ताव के विरोध में आ गए। उन्होंने 24 मार्च को काली पट्टी बांधकर काम किया। विरोध जताते हुए निंदा प्रस्ताव का खंडन किया। पहले देखिये नगर निगम द्वारा जारी संदिग्धों की 3 तस्वीरें… अनिश्चितकालीन हड़ताल की थी तैयारी नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के खिलाफ लाए गए निंदा प्रस्ताव के बाद निगम का माहौल 25 मार्च को भी गरमाया रहा। घटना से आहत अधिकारी और कर्मचारी संगठनों में रोष था। विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी और अधिकारी एकजुट होकर नगर आयुक्त के समक्ष पहुंचे और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी।
कर्मचारियों और अधिकारियों का कहना था-हालिया घटनाक्रम से उनकी भावनाएं आहत हुई हैं, जिसके चलते वे विरोध दर्ज कराने के लिए कार्य बहिष्कार करने को मजबूर हैं। इस दौरान निगम मुख्यालय में काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा था। हालांकि, नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने अधिकारियों को कर्मचारियों को समझाया। जिसके बाद अनिश्चतकालीन हड़ताल टाल दी गई। सीसीटीवी फुटेज निकाले जा रहे
नगर निगम प्रशासन ने 23 मार्च के सीसीटीवी फुटेज अलग कर लिए हैं। इनकी गहनता से जांच कराई जा रही है। नगर निगम प्रशासन का दावा है-23 मार्च को नगर निगम आगरा की प्रस्तावित सदन बैठक को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। बैठक के दौरान 10 से 15 संदिग्ध और अज्ञात लोगों की एंट्री हुई थी, जिनके बारे में आशंका जताई जा रही है कि वे किसी प्रकार के उपद्रव की योजना के तहत वहां पहुंचे थे। हथियार लेकर पहुंचने की आशंका
नगर निगम प्रशासन के अनुसार इन संदिग्ध लोगों के पास हथियार होने के भी संकेत मिले हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस एंगल से भी जांच में जुट गई हैं। नगर निगम प्रशासन द्वारा बैठक स्थल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, जिसमें कई संदिग्ध चेहरों की पहचान किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
कहा गया है कि इन बाहरी लोगों को विशेष रूप से बैठक के दौरान बवाल कराने के लिए बुलाया गया था। लेकिन अधिकारियों और जिम्मेदार पदाधिकारियों के समय पर बैठक में नहीं पहुंचने के कारण कथित साजिश पूरी तरह से नाकाम हो गई। हरीपर्वत थाने में दी तहरीर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निगम प्रशासन सतर्क हो गया है। इस मामले में थाना हरीपर्वत में सहायक अभियंता जीवेक की ओर से तहरीर दी गई है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा रही है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई है और जल्द ही कई अहम खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है। चिह्नित किए जा रहे संदिग्ध
नगर निगम प्रशासन का कहना है-उन्होंने सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से कुछ फोटो निकाले हैं। जिसमें 10 से 15 संदिग्ध दिखाई दे रहे हैं। ये नगर निगम का माहौल खराब करने की फिराक में थे। इनकी पहचान कर पुलिस कार्रवाई तो की ही जाएगी, नगर निगम में इनके प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी।

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