अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर, दशरथ महल और श्रीरामवल्लभाकुंज सहित लगभग 10 हजार मंदिरों में 27 मार्च को श्रीरामलला का प्राकट्य मनाया जाएगा। इस दिन ठीक दोपहर 12 बजे घंटा-घड़ियाल और शंख की मंगल ध्वनियों के बीच श्रीरामलला का प्राकट्य होगा। इस पावन क्षण का इंतजार अयोध्या के हजारों संत आतुरता से कर रहे हैं। जैसे-जैसे यह पल करीब आ रहा है, श्रीराम नाम की ध्वनि और गूंजती जा रही है। सरयू का वेग बढ़ने और हवाओं के शीतल होने की बात कही जा रही है। संतों का मानना है कि श्रीराम जन्म का समय निकट आते ही प्रकृति भी अपनी पूरी छटा के साथ अयोध्या में इस दिव्य क्षण की प्रतीक्षा कर रही है। श्रीरामवल्लभाकुंज के प्रमुख और नित्य सरयू महाआरती के संरक्षक स्वामी राजकुमार के अनुसार सभी देवता भगवान श्रीराम के जन्म की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के जन्म से पूर्व उनके गण, देव और गंधर्व अयोध्या पहुंच चुके हैं, जबकि यक्ष और किन्नर मंगलगान कर रहे हैं। उनके मुताबिक अयोध्या की दसों दिशाओं में उल्लास का वातावरण बना हुआ है। स्वामी राजकुमार ने कहा कि यह अनुभूति का विषय है। जो जितना श्रीराम के प्रति समर्पित है और उनके शरणागत होने की भावना रखता है, वह इस दिव्यता को उतनी ही गहराई से अनुभव कर सकता है। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि, कनक भवन, नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, दशरथ महल, लक्ष्मण किला, सियाराम किला, मणिराम दास जी की छावनी, अशर्फी भवन, श्रीरामलला सदन, बड़ा भक्तमाल, जानकीघाट बड़ा स्थान, हनुमत निवास, हनुमत सदन, जानकी महल ट्रस्ट, राजगोपाल मंदिर, बधाई भवन, बावन मंदिर, बड़ी छावनी सहित हजारों मंदिरों के गर्भगृह सजाए जा चुके हैं। मंदिरों में श्रीरामकथा, श्रीरामचरितमानस का नवान्ह पाठ और अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सरयू तट पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भोर से ही लाखों श्रद्धालु स्नान कर रहे हैं। एडीजी जोन प्रवीण कुमार तिवारी ने श्रीराम जन्मभूमि परिसर में बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिसकर्मियों से श्रद्धालुओं के साथ शालीन व्यवहार करने को कहा। डीएम निखिल टीकाराम फुंडे और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने भी सुरक्षा के साथ सहयोग का मंत्र दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

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