चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी के पावन अवसर पर तीर्थराज प्रयागराज शक्ति की भक्ति में सराबोर नजर आया। ब्रह्म मुहूर्त से ही शहर के प्राचीन शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। आदि शक्तिपीठ अलोपशंकरी, ललिता देवी और कल्याणी देवी मंदिरों में भोर से ही ‘जय माता दी’ के उद्घोष गूंजते रहे। आदि शक्तिपीठ अलोपशंकरी देवी मंदिर में महाष्टमी पर माता का अद्भुत श्रृंगार किया गया। भोर में विशेष आरती के बाद जैसे ही मंदिर के पट आम भक्तों के लिए खोले गए, दर्शन के लिए होड़ लग गई। श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में नारियल, चुनरी, फल और मिष्ठान्न अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों की भारी तैनाती की गई थी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष महाअष्टमी पर सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग का दुर्लभ संयोग बना, जिससे पूजा-अर्चना का फल कई गुना बढ़ गया। अष्टमी तिथि 25 मार्च की दोपहर 1:51 बजे शुरू होकर 26 मार्च की सुबह 11:49 बजे तक रही, जिसके चलते भोर से ही पूजन का विशेष महत्व देखा गया। मां दुर्गा के आठवें स्वरूप, मां महागौरी की आराधना के लिए भक्तों में भारी उत्साह रहा। प्रयागराज के घर-घर में आज कन्या पूजन (कंजक) की धूम रही। अष्टमी का व्रत रखने वाले भक्तों ने नौ छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनके पैर पखारे और उन्हें हलवा-पूरी व चने का प्रसाद ग्रहण कराया। तिथि के विस्तार के कारण कई श्रद्धालु 27 मार्च को महानवमी के अवसर पर भी कन्या पूजन करेंगे। त्योहारों के मद्देनजर प्रयागराज पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। शक्तिपीठों के साथ-साथ शहर के अन्य प्रमुख चौराहों पर भी पैनी नजर रखी गई। मंदिरों के बाहर लंबी कतारों को देखते हुए बैरिकेडिंग की गई और सादे कपड़ों में भी पुलिस बल तैनात रहा। दर्शन-पूजन का यह सिलसिला देर रात तक जारी रहने की संभावना है।

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