लखनऊ के कल्याणपुर स्थित अवध एन्क्लेव में रहने वाले 71 वर्षीय सेवानिवृत्त इंजीनियर वीरेंद्र सिंह साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने उन्हें करीब 75 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर एक करोड़ 17 लाख 90 हजार रुपये ऐंठ लिए। मामले की शिकायत साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराई गई है, जहां पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों की जांच में जुटी है। साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार के मुताबिक, 15 दिसंबर 2025 को वीरेंद्र सिंह के पास एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई का अधिकारी संजय शर्मा बताया और कहा कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के 17 मामले दर्ज हैं, जिनकी जांच सीबीआई कर रही है। इसके बाद ठग ने उन्हें नई दिल्ली के बाराखंभा पुलिस स्टेशन में संपर्क करने के लिए तीन नंबर दिए। डर के चलते वीरेंद्र सिंह ने दिए गए नंबरों पर बात की, जहां उन्हें गिरफ्तारी की धमकी दी गई। ठगों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि जांच में सहयोग करने पर उन्हें बचाया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने अपनी पत्नी को भी इस प्रक्रिया में शामिल कर लिया। करीब एक महीने तक ठगों ने लगातार संपर्क में रहकर वीरेंद्र का भरोसा जीता और उनसे निजी व बैंकिंग जानकारी हासिल कर ली। बाद में एक व्यक्ति ने खुद को सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप कुमार बताकर वीडियो कॉल पर बात की और खाते फ्रीज करने, संपत्ति जब्त करने व बदनाम करने की धमकी दी। ठगों ने आरबीआई और न्यायालय के अधिकारियों का हवाला देते हुए जांच, जमानत और क्लियरेंस के नाम पर अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर कराए। 16 जनवरी से 27 फरवरी 2026 के बीच वीरेंद्र सिंह से कुल 1.17 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम वसूल ली गई। पीड़ित के मुताबिक, ठगों ने उन्हें निवेश खत्म करने, सोना गिरवी रखने और रिश्तेदारों से उधार लेने तक के लिए मजबूर किया। साथ ही परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर पूरे मामले को गोपनीय रखने का दबाव बनाया गया। आखिर में ठगों ने खुद को ‘निर्दोष’ घोषित करने का झांसा देते हुए अंतिम भुगतान कराया और फिर संपर्क तोड़ दिया। फिलहाल एक आरोपी अब भी उनसे संपर्क में है। रकम वापस न मिलने पर वीरेंद्र सिंह ने अपने बच्चों को घटना की जानकारी दी और पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

Leave a Reply