लखनऊ मेट्रो के दूसरे फेज संचालन होते ही शहर तेजी से देश के प्रमुख मेट्रो नेटवर्क वाले शहरों में शामिल हो जाएगा। फेज-2 के पूरा होने के बाद लखनऊ मेट्रो का कुल नेटवर्क करीब 34 किलोमीटर का हो जाएगा। जिससे लखनऊ देश के टॉप-10 मेट्रो शहरों में 9वें स्थान पर आ जाएगा। उत्तर प्रदेश में मेट्रो नेटवर्क लंबाई के मामले में पहले स्थान पर पहुंच जाएगा। पहले फेज में 22.87 किमी, अब 11.165 किमी और जुड़ेगी फिलहाल लखनऊ मेट्रो का संचालन पहले फेज में एयरपोर्ट से मुंशीपुलिया तक हो रहा है। इस रूट की कुल लंबाई 22.87 किलोमीटर है। यह रूट शहर के दक्षिण से उत्तर तक सीधा कनेक्शन देता है। अब सेकेंड फेज के तहत चारबाग से वसंत कुंज तक मेट्रो चलाई जाएगी। इस कॉरिडोर की लंबाई 11.165 किलोमीटर होगी। दोनों फेज को मिलाकर लखनऊ मेट्रो नेटवर्क लगभग 34 किलोमीटर का हो जाएगा। 34 किमी नेटवर्क के साथ देश में 9वें नंबर पर पहुंचेगा लखनऊ शहरी सार्वजनिक परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई के आधार पर लखनऊ फेज-2 के बाद देश में 9वें स्थान पर आ जाएगा। अभी तक लखनऊ इस सूची से बाहर था, लेकिन दूसरे फेज के जुड़ते ही शहर सीधे टॉप-10 में एंट्री करेगा। फेज-2 के बाद लखनऊ मेट्रो, उत्तर प्रदेश में लंबाई के मामले में सबसे आगे निकल जाएगी। लखनऊ में करीब 34 किमी कानपुर में लगभग 16 किमी और आगरा में सिर्फ 6.1 किमीमीटर में मेट्रो चल रही है। इस तरह लखनऊ, कानपुर से दोगुनी और आगरा से पांच गुना ज्यादा लंबा मेट्रो नेटवर्क वाला शहर बन जाएगा। देश में सबसे लंबा दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क देश में मेट्रो नेटवर्क की लंबाई के मामले में दिल्ली-एनसीआर पहले स्थान पर है। 34 किलोमीटर का आंकड़ा छूते ही लखनऊ कई मेट्रो शहरों को पीछे छोड़ देगा। अभी जिन शहरों में मेट्रो नेटवर्क सीमित दूरी में सिमटा है, उनमें आगरा, कानपुर और कुछ अन्य नए मेट्रो शहर शामिल हैं। लखनऊ का नेटवर्क इन सभी से काफी आगे निकल जाएगा। लंबी दूरी का सीधा फायदा यात्रियों को मेट्रो नेटवर्क की लंबाई बढ़ने से यात्रियों को शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक बिना बदले सफर करने की सुविधा मिलेगी। एयरपोर्ट से शुरू होकर चारबाग और वसंत कुंज तक मेट्रो पहुंचने से लखनऊ का बड़ा हिस्सा एक ही नेटवर्क में जुड़ जाएगा। इससे सड़क यातायात का दबाव कम होगा और रोजाना लंबी दूरी तय करने वालों को राहत मिलेगी। मेट्रो कॉरपोरेशन के अधिकारियों के मुताबिक, नेटवर्क की लंबाई बढ़ने के साथ ऑपरेशन, मेंटेनेंस और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। इसी वजह से फेज-2 में स्टेशनों और ट्रैक डिजाइन पर खास ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए स्टेशनों की डिजाइन का टेंडर भी जारी किया जा चुका है। लखनऊ का नॉर्थ-साउथ कॉरडोर मुंशीपुलिया से एयरपोर्ट तक पहले चल रहा है। अब फेज-2 में ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर बन रहा है जो बसंतकुंज से चारबाग तक रहेगा।
———————– ये खबर भी पढ़िए- लखनऊ मेट्रो कमजोर पटरियों पर दौड़ रही : CAG रिपोर्ट में खुलासा- स्पीड सर्टिफिकेट रिन्यू नहीं, ठेकेदार को करोड़ों का फायदा पहुंचाया लखनऊ मेट्रो में रेल की पटरियां निर्धारित मानकों से कमजोर हैं। मेट्रो कॉरपोरेशन ने स्पीड लिमिट के प्रमाण पत्र का नवीनीकरण कराए बिना ही मेट्रो का संचालन कर यात्रियों की सुरक्षा को भी जोखिम में डाला है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। CAG ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) के क्षेत्र के विकास से लेकर गरीबों को भूखंड आवंटन पर भी सवाल उठाए हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

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