मुरादाबाद की बिलारी सीट से लगातार तीसरी बार समाजवादी पार्टी के विधायक मोहम्मद फहीम का कहना है कि विपक्ष में होने के बावजूद उन्होंने बिलारी में 68 करोड़ रुपए की लागत से अटल आवासीय विद्यालय बनवाया। इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बताते हुए फहीम कहते हैं, यूं तो विपक्ष में होने की वजह से सरकार ने विकास के कई बड़े प्रोजेक्टू पूरे ही नहीं होने दिए। जो भी लिखकर दिया, उसे माना नहीं, लेकिन अटल आवासीय विद्यालय बनना बड़ा उपलब्धि है। फहीम कहते हैं- टिकट का फैसला तो राष्ट्रीय अध्यक्ष को करना है लेकिन मुझे इतना यकीन है कि मैं पार्टी का वफादार सिपाही हूं और जनता की सेवा मैंने पूरे मन से की है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में विधायक मोहम्मद फहीम ने सवालों के बेबाकी से जवाब दिए। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल- पिछले 4 साल के अपने कामकाज और आप 10 में से कितने नंबर देंगे?
जवाब- मैं तो जनता का खादिम हूं। मेरी औकात नहीं है कि मैं खुद को नंबर दूं। नंबर तो मेरी जनता ही दे सकती है। मैं हमेशा लोगों के सुख दुख में साथ रहा हूं। आवाम की आवाज नक्कारे खुदा है जनता जिसे चाहे अर्श पर रखे जिसे चाहे फर्श पर रखे। मेरी कोशिश ये रही है कि मैं अपनों के काम आ सकूं। सवाल- सबसे बड़ा काम आपने कौन सा कराया ? जवाब- मैं विपक्ष में हूं। मैंने हमेशा सदन में भी जनता की आवाज उठाई है। विपक्ष के विधायकों ने जो काम दिए थे उन्हें सरकार ने पूरा नहीं होने दिया। लेकिन, मैं अटल आवासीय विद्यालय बनवाने में सफल हुआ हूं। 68 करोड़ की लागत से बिलारी विधानसभा सीट के पीपली गांव में यह स्कूल सीलिंग की जमीन पर बना है। यह जमीन उस वक्त खाली कराई गई थी, जब मेरे पिता विधायक थे। इसके अलावा मैंने साढ़े चार करोड़ रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष से अलग-अलग बीमारियों से जूझ रहे लोगों को दिलवाए हैं। सवाल-ऐसा कौन सा काम है, जिसे आप नहीं करा पाए? जवाब- मैं एक मेडिकल कॉलेज बनाना चाहता हूं। बिलारी में सरकारी गर्ल्स डिग्री कॉलेज बनाने का भी मेरा सपना है। जब कभी वक्त आएगा तो मैं ये सपना जरूर पूरा करूंगा। सवाल- इस बार क्या फिर आप टिकट के दावेदार हैं ? जवाब- मैं कार्यकर्ता हूं। राष्ट्रीय अध्यक्ष हमारे सरपरस्त हैं। उन्होंने हमेशा मुझ पर विश्वास जताया है। आगे भी जो उनका आदेश होगा उस पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा।
सवाल-तो क्या आपको इस बार टिक्ट मिलेगा? जवाब- ये सब हमारे लिए ऐसा सवाल है कि हम जैसे कार्यकर्ता जवाब नहीं दे सकते। हम पार्टी के वफादार कार्यकर्ता हैं। हम पार्टी के लिए काम करते हैं। पार्टी ने हमें इस लायक समझा तो हमें बनाया आगे भी जिम्मेदारी देगी तो उसे निभाएंगे।

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