प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल ने बुधवार को पहली बार सफल किडनी प्रत्यारोपण किया। हनुमानगंज के रामनाथपुर निवासी 22 वर्षीय अभिषेक सिंह को उनकी मां सरोज ने अपनी एक किडनी दान की, जिससे उन्हें नया जीवन मिला। सफल सर्जरी की पूरी प्रक्रिया
डॉ. दिलीप चौरसिया की अगुवाई में लखनऊ से आए विशेषज्ञों की टीम ने सुबह 10 बजे शुरू हुई यह जटिल सर्जरी तीन घंटे में पूरी की। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और वर्तमान में अभिषेक व उनकी मां दोनों स्वस्थ हैं। सर्जरी से पहले मंगलवार को ऑपरेशन थिएटर में बाहरी कर्मचारियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। डॉ. सौम्या गुप्ता ने बताया कि डोनर मां को 3-4 दिनों में और अभिषेक को एक सप्ताह बाद डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. वीके पांडेय ने टीम को बधाई दी, यह बताते हुए कि अस्पताल को सितंबर 2025 में सरकारी अनुमति मिली थी। मरीज का दो वर्षों का संघर्ष
अभिषेक पिछले दो वर्षों से स्टेज-5 क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित थे। उनके पिता अशोक सिंह ने कई अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन डॉ. संतोष पटेल व डॉ. सौम्या गुप्ता की सलाह पर एसआरएन पहुंचे। यहां ट्रांसप्लांट की सिफारिश हुई, जो सफल रही। चिकित्सकीय टीम व भविष्य की योजनाएं
टीम में प्रमुख रूप से डॉ. श्रीश मिश्रा, डॉ. दीपक गुप्ता, डॉ. शिवम सिंह, डॉ. योगेंद्र सिंह, डॉ. रविंद्र गुप्ता, डॉ. संतोष मौर्य, डॉ. सौम्या गुप्ता, प्रो. डॉ. राजीश गौतम, डॉ. आमन, डॉ. मुकेश सिंह, डॉ. आनंदेंद्र व डॉ. आजिन आहमद शामिल थे। अस्पताल के मीडिया प्रभारी डॉ. संतोष सिंह ने बताया कि एक अन्य मरीज का ट्रांसप्लांट अगले सप्ताह होगा। इस सुविधा से प्रयागराज व आसपास के जिलों के मरीजों को लखनऊ-वाराणसी जैसे शहरों के महंगे चक्कर से राहत मिलेगी। एसआरएन अब यूपी का पांचवां सरकारी केंद्र है जहां किडनी ट्रांसप्लांट हो रहा है। जांच एवं डोनर की भूमिका सबसे अहम
डॉ. श्रीश मिश्रा ने बताया कि स्टेज-5 क्रॉनिक किडनी डिजीज में ट्रांसप्लांट ही सर्वोत्तम विकल्प है। डॉ. श्रीश मिश्रा ने बताया कि ऑथराइजेशन कमेटी से अनुमति व कानूनी प्रक्रियाओं के बाद यह संभव हुआ। डॉ. अरविंद गुप्ता ने HLA टाइपिंग जैसी जांचों व डोनर-मरीज तालमेल पर जोर दिया।

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