लखनऊ के गोमतीनगर स्थित संत गाडगे जी महाराज ऑडिटोरियम में राज्य नाट्य समारोह की दूसरी संध्या हास्य से भरपूर रही। बुधवार को कानपुर की अनुभूति नाट्य इकाई ने लोकप्रिय हास्य नाटक ‘दिल की दुकान’ का मंचन किया। रतन सिंह राठौर द्वारा निर्देशित इस नाटक को दर्शकों ने खूब सराहा और इसने हंसी के माध्यम से परिवार में सामंजस्य का महत्वपूर्ण संदेश दिया। नाटक की कहानी एक अनोखी दुकान के इर्द-गिर्द घूमती है, जहाँ लोग अपनी पसंद का ‘दिल’ खरीद सकते हैं। इसकी शुरुआत एक कंजूस पति से होती है, जिसकी आदतों से तंग आकर पत्नी उसका दिल बदलकर ‘बादशाह’ का दिल लगवा देती है। इसके बाद पति खुद को सचमुच बादशाह समझने लगता है और बेतहाशा पैसे खर्च करने लगता है, जिससे परिवार के लिए नई समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं। दिल बदलकर उसे ‘लैला’ जैसा बना दिया जाता है इसी तरह, एक झगड़ालू पत्नी का दिल बदलकर उसे ‘लैला’ जैसा बना दिया जाता है, जिसके बाद वह हर समय प्यार का इजहार करने लगती है। यह बदलाव भी पति के लिए परेशानी का सबब बनता है। एक अन्य प्रसंग में, एक शराबी पति का दिल ‘महात्मा’ जैसा कर देने पर वह अपनी पत्नी को ‘माता’ कहकर उससे दूरी बना लेता है। इन सभी घटनाओं के माध्यम से नाटक ने यह दर्शाया कि कृत्रिम परिवर्तन समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि उन्हें और बढ़ा सकते हैं। अंततः, जब सभी पात्रों को उनके असली दिल वापस मिलते हैं, तब कहानी एक सुखद मोड़ लेती है। नाटक यह संदेश देता है कि रिश्तों में संतुलन और आपसी समझ ही सबसे महत्वपूर्ण है। कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का मनोरंजन कराया मंच पर कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। मुरारी गौड़, अंकिता चौधरी, श्याम मनोहर तिवारी, मीत कमल द्विवेदी, योगेंद्र श्रीवास्तव, प्रिया वर्मा, वलीउल्लाह खॉन, हंसशिखा, अक्षय इनैमुअल सिंह और शेखर यादव ने अपने किरदारों को जीवंतता प्रदान की और दर्शकों को खूब हँसाया। मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और ध्वनि संयोजन सहित पूरी प्रस्तुति ने नाटक को बेहद प्रभावशाली बना दिया।

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