सपा ने फूलन देवी की बड़ी बहन रुक्मिणी देवी निषाद को समाजवादी महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। इसकी घोषणा बुधवार को सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने की। रुक्मिणी देवी की नियुक्ति सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की रजामंदी के बाद की गई है। रुक्मिणी को रूबी श्रीवास्तव की जगह सपा महिला का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। रुक्मिणी मूलरूप से जौनपुर की रहने वाली हैं। रुक्मिणी को क्यों मिली नियुक्ति
माना जा रहा है कि यह नियुक्ति सिर्फ एक रुटीन बदलाव नहीं, सपा की PDA रणनीति का हिस्सा है। निषाद वोटबैंक में सेंध लगाने के लिए सपा ने यह नियुक्ति की है। यूपी में निषाद-मल्लाह समुदाय बड़ी पिछड़ी जाति है। पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में इसका अच्छा-खासा प्रभाव है। अखिलेश यादव 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इस समुदाय को और मजबूती से जोड़ना चाहते हैं। सपा का महिलाओं पर फोकस
चुनाव से पहले अखिलेश यादव महिलाओं पर फोकस कर रहे हैं। हाल ही में अखिलेश यादव ने महिलाओं के लिए नारी समृद्धि सम्मान योजना का ऐलान किया था। अब फूलन देवी की बहन रुक्मिणी देवी को महिला सभा की कमान सौंपकर पार्टी खासकर पिछड़ी जाति की महिलाओं के बीच संदेश दे रही है कि सपा हर जाति के साथ महिलाओं का सम्मान करती है। बुंदेलखंड में सक्रिय रहती हैं रुक्मिणी देवी
रुक्मिणी देवी जालौन के गांव शेखपुर गुड्ढा पुरवा की रहने वाली हैं। वह बुंदेलखंड में राजनीतिक और सामाजिक तौर पर सक्रिय मानी जाती हैं। उनकी शादी औरैया के बूढ़ा दाना गांव में हुई है। पारिवारिक रूप से भी वह मजबूत पृष्ठभूमि रखती हैं। उनके 3 बेटे और 2 बेटियां हैं। वर्तमान में वह अपने गांव के साथ ग्वालियर में भी समय बिताती हैं। वहां उनके बड़े बेटे मथुरा पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। अन्य बेटों के नाम संतोष और छुन्ना हैं। अखिलेश ने गिफ्ट की थी स्कॉर्पियो
रुक्मिणी देवी ने राजनीति की शुरुआत से ही समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ाव बनाए रखा है। वह लगातार संगठन के लिए सक्रिय रही हैं। बताया जाता है कि हाल ही में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें एक स्कॉर्पियो गाड़ी भी गिफ्ट की थी। 2022 के चुनाव में निषाद पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी
साल- 2022 के विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी ने कालपी सीट पर मजबूती से चुनाव लड़ा था। निषाद पार्टी करीब 2300 वोटों के अंतर से दूसरे स्थान पर रही थी, जबकि सपा प्रत्याशी को जीत मिली थी। ऐसे में इस क्षेत्र में निषाद समाज का प्रभाव अहम माना जाता है।

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