कनोहर लाल स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना (सत्र 2025-26) के अंतर्गत बुधवार को अंतिम एकदिवसीय शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। शिविर के तहत स्वयंसेविकाओं को राजकीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का शैक्षिक भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने 1857 की क्रांति और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को जाना। संग्रहालय के केयरटेकर हरिओम शुक्ला ने छात्राओं को जानकारी देते हुए बताया कि भारत की पहली स्वतंत्रता क्रांति की शुरुआत मेरठ से हुई थी, इसी कारण इसे ‘क्रांतिधरा’ कहा जाता है। उन्होंने संग्रहालय में संरक्षित ऐतिहासिक सामग्रियों और घटनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। भ्रमण के दौरान छात्राओं ने 1857 की क्रांति में मेरठ की अहम भूमिका के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हुए स्वतंत्रता संग्राम के बारे में भी जाना। इस अवसर पर रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, कुंवर सिंह, बहादुर शाह जफर, बेगम हजरत महल और नाना साहेब जैसे महान सेनानियों के योगदान पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पूजा राय के नेतृत्व में सभी स्वयंसेविकाएं शिविर में शामिल रहीं। आयोजन को सफल बनाने में संजीव महेश्वरी और सुरेश चंद्र प्रजापति का विशेष योगदान रहा। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. किरन प्रदीप ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन छात्राओं में इतिहास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ देशभक्ति की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।

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