बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता संजय मिश्रा मंगलवार शाम वाराणसी पहुंचे। यहां वह पैदल ही गलियों और घाट पर घूमे। चाय की टपरी पर गए। वहां चाय पी। लोगों से बात की। उनके साथ समय बिताया। भूख लगी तो खड़े होकर सैंडविच बनाया। फिर उसे खाया। बुधवार सुबह वह काल भैरव मंदिर पहुंचे। यहां विधि-विधान से पूजा की। उन्होंने कहा- काशी काफी बदल रही है, लेकिन इसकी आत्मा आज भी वही है। मुझे यहां आकर सुकून मिलता है। चाय पी, फिर सैंडविच बनाकर खाया एक्टर संजय मिश्रा मंगलवार शाम करीब 4 बजे काशी पहुंचे। यहां उन्होंने गंगा घाटों का भ्रमण किया। इसके बाद वह काशी विश्वनाथ धाम से करीब आधा किलोमीटर दूर ब्राह्मनाल स्थित मौली टी स्टाल पर पहुंचे। यहां चाय पी रहे लोगों के बीच में बैठकर लोगों के साथ चाय पी। उनसे बातें की। फिर दुकान के अंदर पहुंच गए। यहां उन्होंने खुद अपने हाथों से सैंडविच बनाया। इसके बाद उसे खाया। उन्होंने कहा कि बनारस के खानपान का मिजाज ही अलग है। मुझे खाना बनाना बहुत पसंद है। यह मेरे लिए सुकून देने वाला काम है। काल भैरव मंदिर में दर्शन किए, पाठ भी किया बुधवार सुबह वह काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के मंदिर में पहुंचे। गर्भगृह के अंदर मंदिर के पुजारी ने विधि विधान से पूजा कराई। भैरव अष्टक का पाठ किया। उन्होंने बाबा काल भैरव के मंदिर में लगभग 15 मिनट का समय बिताया। दर्शन करने के बाद उन्होंने कहा कि काल भैरव मंदिर में दर्शन करने के बाद लगता है कि शरीर और मन हल्का हो गया है। यहां से निकलने के बाद वह पागल बाबा के साथ घूमे। उनके साथ चाय पी। एक्टर ने कहा कि बनारस ऐसा शहर है, जो जिसको चाहिए वह देता है। इस शहर से पाने के लिए अपने आपको इसे पूरी तरह सौंपना पड़ता है। मेरी रग-रग में बनारस रचा बसा है। बनारस से जुड़ी बचपन की यादें और यहां की खुशबू मेरे जीवन को महकाती रहती है। एक्टर बुधवार सुबह करीब 9 बजे वापस मुंबई के लिए रवाना हो गए। अब जानिए कैसा रहा संजय मिश्रा का जीवन संजय मिश्रा का जन्म वर्ष 1963 में बिहार के दरभंगा में हुआ था। उनके पिता शंभूनाथ मिश्रा एक पत्रकार थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा वाराणसी के केंद्रीय विद्यालय, बीएचयू परिसर से हुई। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) से 1989 में अभिनय की पढ़ाई पूरी की। संजय मिश्रा ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविज़न धारावाहिक चाणक्य से की। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों और धारावाहिकों में काम किया। उन्हें आंखों देखी (2015) के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्टर से सम्मानित किया गया। उन्होंने गोलमाल: फन अनलिमिटेड, धमाल, प्रेम रतन धन पायो और टोटल धमाल जैसी कई लोकप्रिय फिल्मों में काम किया है। इसके अलावा, वे फिल्म राखोश में मुख्य भूमिका निभा चुके हैं, जो भारत की पहली पीओवी तकनीक पर आधारित हिंदी फिल्म मानी जाती है। बनारस से संजय मिश्रा खास जुड़ाव वाराणसी से उनका पुराना नाता रहा है, क्योंकि उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा यहीं से प्राप्त की थी। यही कारण है कि इस यात्रा के दौरान उनका भावनात्मक जुड़ाव भी साफ नजर आया है। वह जब अपने शूटिंग से खाली होते हैं तो वाराणसी पहुंच जाते हैं।
…………………… ये खबर भी पढ़िए- मोनालिसा ने डायरेक्टर सनोज मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए:बोलीं- मुझे कई बार गलत तरीके से छुआ, परिवार ने मेरा साथ नहीं दिया प्रयागराज के कुंभ मेले से चर्चा में आईं मोनालिसा भोंसले ने मंगलवार को डायरेक्टर सनोज मिश्रा पर फिल्म ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ की शूटिंग के दौरान गलत तरीके से छूने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके पति को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। मोनालिसा ने केरल के कोच्चि में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सनोज मिश्रा अच्छा इंसान नहीं है। उसने मुझे 10 बार गलत तरीके से छुआ। मैंने अपने परिवार को बताया कि सनोज मिश्रा ने मुझे छुआ, लेकिन उन्होंने मेरा साथ नहीं दिया। मुझे पता है कि मैंने क्या सहा है। पढ़ें पूरी खबर

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