रामनवमी के मुख्य पर्व पर दोपहर ठीक 12 बजे चार मिनट के रामलला के ललाट पर सूर्य किरणों से अभिषेक होगा। इसे सूर्यतिलक भी कहा जाता है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने सीबीआरआई, रुड़की व आप्टिका लिमिटेड बंगलुरु से इसके लिए 10 वर्ष का अनुबंध कर रखा है।
रामनवमी के पर्व पर राम मंदिर में विराजित रामलला के ललाट पर मध्याह्न ठीक 12 बजे सूर्य तिलक का आयोजन वैज्ञानिक पद्धति से होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप यहां श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से अनुबंधित सीबीआरआई व आप्टिका लिमिटेड बंगलुरु के वैज्ञानिकों ने मंगलवार को राम मंदिर में लगाए गए उपकरणों का परीक्षण किया।
तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र कहते हैं कि इन उपकरणों के सहारे मध्याह्न ठीक 12 बजे भगवान सूर्य की किरणें परावर्तित होकर भगवान के ललाट पर पड़कर तिलक का स्वरूप धारण करेंगी। उन्होंने बताया कि यह दृश्य करीब चार मिनट तक देखा जा सकेगा । इसका सीधा प्रसारण दूरदर्शन व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होगा उन्होंने बताया कि इसका सीधा प्रसारण दूरदर्शन व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सूर्य की गति के आधार पर कम्प्यूटराईज्ड व्यवस्था में 19 सालों तक सूर्य गतिमान रहेंगे। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों ने सूर्य की गति का अध्ययन कर उपकरणों का निर्माण किया है। अगले 19 साल के बाद सूर्य की गति में परिवर्तन दिखाई देगा। इसके पहले यहां लगे उपकरणों से किसी तरह के छेड़छाड़ की जरूरत नहीं होगी।

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