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वाराणसी में अभिनेता संजय मिश्रा का सादा अंदाज़:गलियों और घाटों में घूमे, सैंडविच खाया; बोले- काशी बदल रही, लेकिन आत्मा वही

बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता संजय मिश्रा वाराणसी पहुंचे। यहां वह पैदल ही गलियों और घाट पर घूमे। चाय की टपरी पर गए। वहां चाय पी। लोगों से बात की, उनके साथ समय बिताया। भूख लगी तो खड़े होकर सैंडविच बनवाकर खाया। इसके बाद वह काल भैरव मंदिर पहुंचे। विधि-विधान से पूजा की। उन्होंने कहा- काशी काफी बदल रही है, लेकिन इसकी आत्मा आज भी वही है। एक्टर संजय मिश्रा मंगलवार देर शाम काशाी पहुंचे। यहां उन्होंने गंगा घाटों का भ्रमण किया। इसके बाद वह ब्राह्मनाल स्थित मौली टी स्टाल पर पहुंचे। यहां चाय पी रहे लोगों के बीच में बैठकर लोगों के साथ चाय पी। उनसे बातें की।
फिर दुकान के अंदर पहुंचे। खड़े होकर एक सैंडविच बनवाया। उन्होंने कहा कि मुझे खाना बनाना बहुत पसंद है। यह मेरे लिए सुकून देने वाला काम है। पहले देखें तस्वीर… अब जानिए कैसा रहा संजय मिश्रा का जीवन संजय मिश्रा का जन्म वर्ष 1963 में बिहार के दरभंगा में हुआ था। उनके पिता शंभूनाथ मिश्रा एक पत्रकार थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा वाराणसी के केंद्रीय विद्यालय, बीएचयू परिसर से हुई। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) से 1989 में अभिनय की पढ़ाई पूरी की। संजय मिश्रा ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविज़न धारावाहिक चाणक्य से की। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों और धारावाहिकों में काम किया। उन्हें आंखों देखी (2015) के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्टर से सम्मानित किया गया। उन्होंने गोलमाल: फन अनलिमिटेड, धमाल, प्रेम रतन धन पायो और टोटल धमाल जैसी कई लोकप्रिय फिल्मों में काम किया है। इसके अलावा, वे फिल्म राखोश में मुख्य भूमिका निभा चुके हैं, जो भारत की पहली पीओवी तकनीक पर आधारित हिंदी फिल्म मानी जाती है। बनारस से संजय मिश्रा खास जुड़ाव वाराणसी से उनका पुराना नाता रहा है, क्योंकि उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा यहीं से प्राप्त की थी। यही कारण है कि इस यात्रा के दौरान उनका भावनात्मक जुड़ाव भी साफ नजर आया है। वह जब अपने शूटिंग से खाली होते हैं तो वाराणसी पहुंच जाते हैं।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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