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मेयर ने आरोपों के साथ सीएम को भेजा निंदा प्रस्ताव:आगरा में मेयर और नगर आयुक्त के बीच बढ़ ही तनातनी

आगरा में मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह और नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। अब मेयर ने नगर आयुक्त के खिलाफ पार्षदों द्वारा पारित निंदा प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजकर कार्रवाई की मांग की है। मेयर ने नगर आयुक्त पर वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और सदन की अवमानना के आरोप लगाए हैं।
सीएम को भेजे पत्र में मेयर ने कहा है-नगर आयुक्त ने नगर निगम अधिनियम की धाराओं का दुरुपयोग करते हुए अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया। आरोप है कि करोड़ों रुपये के कार्य ऑफलाइन टेंडर और रेट लिस्ट के माध्यम से बिना पारदर्शिता के आवंटित किए गए।
अब विस्तार से पढ़िये…
आगरा नगर निगम का सियासी पारा हाई होता जा रहा है। मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह और नगर आयुक्त खंडेलवाल के बीच की रार में अब पार्षद और कर्मचारी भी शामिल हो गए हैं। पार्षदों ने नगर आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया था। इसके बाद मंगलवार इसके विरोध में नगर निगम के कर्मचारी उतर आए थे। जिस तरह से पार्षद जहां मेयर के समर्थन में उतर आए थे। उसी तरह से नगर निगम के कर्मचारी नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के समर्थन में आ गए। विरोधस्वरूप उन्होंने काली पट़्टी बांधकर काम किया। चपरासी से लेकर क्लर्क और अधिकारियों ने भी काली पट्‌टी बांधकर काम किया था। उन्होंने सोमवार को नगर निगम सदन में बैठक के दौरान नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के खिलाफ लाए गए निंदा प्रस्ताव का विरोध किया था। अब पढ़िये मेयर ने सीएम से क्या शिकायत की
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे शिकायती पत्र में मेयर का कहना है-नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और सदन की अवमानना की है। इन अनियमितताओं की शिकायत शासन स्तर पर किए जाने के बाद नगर आयुक्त ने अपनी जवाबदेही से बचने के लिए सदन की बैठक बाधित करने का प्रयास किया। पार्षदों में विकास कार्यों की अनदेखी और 50-50 लाख रुपये के कार्यों के प्रस्तावों पर अमल न होने को लेकर भी आक्रोश है। 15वें वित्त आयोग के प्रस्तावों पर भी कोई कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है। महापौर ने कहा कि सदन की बैठक में नगर आयुक्त और उनके अधीनस्थ अधिकारी शामिल नहीं हुए, जो निगम के इतिहास का काला दिन है। मेयर ने नगर आयुक्त पर उठाया सवाल
मेयर ने यह भी कहा-नगर आयुक्त लोकसभा सत्र और विधानमंडलीय समिति की बैठक का हवाला देकर सदन टालने की बात कर रहे हैं, जबकि 21 जुलाई 2023 को भी सदन की बैठक हुई थी, तब लोकसभा का मानसून सत्र चल रहा था। मेयर के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानमंडल की सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति (2025-26) के आगमन पर जिलाधिकारी ने नगर निगम को केवल खानपान आदि की व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी थी। नगर आयुक्त का क्या है कहना?
नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल का कहना है-मेयर कार्यालय से बैठक को लेकर कोई लिखित निर्देश नहीं मिला। 13 मार्च को बजट बैठक कराने का प्रस्ताव पहले ही दिया जा चुका। शहर के विकास के लिए 2025-26 का बजट पास होना बेहद जरूरी है। संसद के बजट सत्र के चलते बैठक पर रोक की स्थिति थी। विशेष परिस्थितियों में ही बैठक संभव है। मेयर को पत्र भेजकर निर्देश मांगे गए, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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