बरेली कैंट विधानसभा से भाजपा विधायक संजीव अग्रवाल ने अपने कार्यकाल में सड़कों के जाल, जलभराव की समस्या के समाधान और बाकरगंज सिटी स्टेशन के पास अंडरपास जैसे प्रोजेक्ट्स को प्रमुख उपलब्धि बताया। साथ ही ‘नाथ कॉरिडोर’ के जरिए शहर को नई पहचान देने की कोशिश भी गिनाई। हालांकि, उन्होंने स्मार्ट सिटी के तहत बने स्काई-वॉक और जंक्शन मार्केट जैसे प्रोजेक्ट्स पर खुलकर माना कि निर्णय लेने में चूक हुई। वहीं, अधूरे कामों की बात करें तो सुभाष नगर पुलिया के आसपास ट्रैफिक समस्या अब भी चुनौती बनी हुई है, जिसके समाधान के लिए नए अंडरपास की योजना पर काम जारी है। इसके अलावा बरेली में एम्स और बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को उन्होंने अपनी प्राथमिकता बताया, जिन पर अभी काम होना बाकी है। विधानसभा 2027 के चुनाव से पहले विधायक ने क्या किया, अभी इस विधानसभा में क्या होना बाकी है? क्या फिर से इस सीट पर टिकट मिलेगा? इन मुद्दों पर दैनिक भास्कर ने संजीव अग्रवाल से बातचीत की। आगे पढ़िए सवाल-जवाब… सवाल: आपने अपने कार्यकाल में क्या-क्या मुख्य विकास कार्य किए हैं?
जवाब: देखिए, भारतीय जनता पार्टी ने मुझे सेवा का मौका दिया है और मैं निरंतर जनता के बीच रहता हूं। सड़कों के जाल से लेकर जलभराव की समस्या तक, मैंने हर मुद्दे पर ध्यान दिया है। बाकरगंज (सिटी स्टेशन) के पास अंडरपास का काम तेजी से चल रहा है और 30 जून तक इसके शुरू होने की उम्मीद है। इसके अलावा, बरेली को ‘नाथ नगरी’ के रूप में विश्व पटल पर पहचान दिलाने के लिए नाथ कॉरिडोर का काम शुरू हो चुका है। धोपेश्वर नाथ और तपेश्वर नाथ मंदिरों को भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। सवाल: स्मार्ट सिटी के तहत करोड़ों खर्च हुए, लेकिन स्काई-वॉक और जंक्शन मार्केट जैसे प्रोजेक्ट्स ‘फेल’ साबित हो रहे हैं?
जवाब: यह सच है कि स्मार्ट सिटी एक महत्वाकांक्षी योजना है और बरेली में काफी काम हुआ है। लेकिन जहां तक स्काई-वॉक या पार्किंग मार्केट की बात है, मैं स्वीकार करता हूं कि कहीं न कहीं निर्णय लेने में चूक हुई है। जनता का पैसा जनहित में लगना चाहिए था, लेकिन मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में ये प्रोजेक्ट्स भी शहर के विकास में योगदान देंगे। सवाल: बरेली में सरकारी मेडिकल कॉलेज और केंद्रीय विश्वविद्यालय की कमी खलती है, इस पर आपका क्या स्टैंड है?
जवाब: बरेली कॉलेज एक ऐतिहासिक धरोहर है। मैंने व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री जी के सामने इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही, मैंने विधानसभा में बरेली के लिए एम्स (AIIMS) की मांग मजबूती से उठाई है, क्योंकि यहां से लखनऊ या दिल्ली 250 किमी दूर हैं। डबल इंजन की सरकार इस पर सकारात्मक विचार कर रही है। सवाल: पिछले 4 साल के कामकाज को आप 10 में से कितने नंबर देंगे और क्या आप फिर से टिकट के दावेदार हैं?
जवाब: नंबर देना जनता का काम है, लेकिन मैं संतुष्ट हूँ कि मैंने जन-विश्वास जीता है। जहाँ तक टिकट का सवाल है, मैं पार्टी का एक अनुशासित कार्यकर्ता हूँ। अगर संगठन निर्देश देगा, तो मैं फिर से जनता की सेवा के लिए मैदान में उतरूँगा। सवाल: सबसे बड़ा कौन सा काम है जो आपने कराया है?
जवाब: मेरे कार्यकाल में सिटी स्टेशन बाकरगंज वाला काम सबसे महत्वपूर्ण रहा है। वहां अक्सर जाम लगता था, जिसके लिए अंडरपास स्वीकृत कराके काम शुरू कराया गया। इसके अलावा, सुभाष नगर में ‘Y’ शेप का पुल काफी समय से अटका हुआ था, जिसे मैंने पूरा कराया। इससे क्षेत्र की लगभग 2 लाख की आबादी को बड़ी राहत मिली है। साथ ही शहर की प्रमुख सड़कों का कायाकल्प कराया गया है। सवाल: ऐसा कौन सा काम है जो आप अब तक नहीं करा पाए?
जवाब: राजनीति में विकास एक निरंतर प्रक्रिया है। हालांकि मैंने जनता के विश्वास पर खरा उतरने का पूरा प्रयास किया है, लेकिन सुभाष नगर पुलिया से आने-जाने वाले रास्ते की समस्या अभी भी बनी हुई है। उसके लिए मैं एक और अंडरपास की योजना पर काम कर रहा हूं। मुझे विश्वास है कि इस वर्ष के भीतर मैं उस कार्य को भी धरातल पर शुरू कराने में सफल रहूंगा। सवाल: चुनाव नजदीक हैं, क्या आपने इस बार फिर से टिकट के आप दावेदार हैं?
जवाब: देखिए, मैं वर्तमान में जनप्रतिनिधि हूँ, विधायक हूँ और पार्टी का एक समर्पित सिपाही हूँ। भारतीय जनता पार्टी ने मुझ पर भरोसा जताया, मुझे टिकट दिया और जनता ने भारी बहुमत से जिताया। जहां तक अगले चुनाव का सवाल है, भाजपा में टिकट का निर्णय संगठन और शीर्ष नेतृत्व करता है। हम निरंतर काम करने वाले कार्यकर्ता हैं। मैंने अपने कार्यों और व्यवहार के माध्यम से जनता का विश्वास जीतने का प्रयास किया है। अगर पार्टी आगे भी मुझे कोई जिम्मेदारी या निर्देश देगी, तो मैं निश्चित रूप से फिर से जनता के बीच जाना चाहूँगा। हम व्यक्तिवादी नहीं, संगठनवादी राजनीति करते हैं।

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