कन्नौज में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के मंच पर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक जोड़े के नाम पर बैठे दूल्हे की पहचान संदिग्ध निकली और पूछताछ होते ही वह मौके से फरार हो गया। जांच में सामने आया कि पूरा मामला फर्जी आवेदन से जुड़ा है, जिसमें डीएम आवास के एक कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगे हैं। दूसरी ओर, पीड़ित दंपति दो दिनों से थानों के चक्कर काट रहा है, लेकिन उनकी शिकायत तक दर्ज नहीं की गई। महिला थाने में फूट-फूटकर रोती पत्नी का वीडियो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। 21 मार्च को शहर के पीएसएम पीजी कॉलेज में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का आयोजन हुआ था। मंडप संख्या 7 में चार जोड़ों के नाम चस्पा थे, जिनमें एक नाम नीतू कुमार और ज्योति का भी था। कार्यक्रम के दौरान किसी ने मुख्य विकास अधिकारी को फोन कर इस जोड़े के आवेदन को फर्जी बताया। सूचना पर पहुंचे कर्मचारियों ने जैसे ही पूछताछ शुरू की, मंडप में दूल्हा बनकर बैठा युवक मौके से भाग निकला। इसके बाद उस जोड़े का विवाह रुकवा दिया गया। डीएम आवास के कर्मी पर फर्जीवाड़े का आरोप जांच में सामने आया कि यह पूरा मामला डीएम आवास के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वेदप्रकाश से जुड़ा है। आरोप है कि उसने अपनी पत्नी और साली के साथ मिलकर नीतू कुमार के नाम से फर्जी आवेदन कराया। आवेदन में दर्ज मोबाइल नंबर भी कर्मचारी की पत्नी का बताया जा रहा है, जबकि दुल्हन के नाम पर उसकी साली का नाम दर्ज किया गया। इस फर्जीवाड़े के जरिए योजना के तहत मिलने वाले लाभ को हड़पने की साजिश रची गई थी। 60 हजार कैश और 25 हजार के उपहार पर थी नजर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत वधु के खाते में 60 हजार रुपए ट्रांसफर किए जाते हैं, साथ ही 25 हजार रुपए के उपहार भी दिए जाते हैं। आरोप है कि इसी रकम को हड़पने के लिए पूरा फर्जी खेल रचा गया। पीड़ित नीतू कुमार का कहना है कि उसे इस शादी या आवेदन की कोई जानकारी ही नहीं थी और उसकी जगह किसी अन्य युवक को दूल्हा बनाकर बैठाया गया।
थानों के चक्कर, नहीं दर्ज हुई रिपोर्ट; मिल रहीं धमकियां फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने के बाद नीतू कुमार अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ तिर्वा कोतवाली पहुंचे, लेकिन वहां पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से इनकार कर दिया। इसके बाद दंपति महिला थाने पहुंचे, जहां भी उनकी तहरीर नहीं ली गई। कार्रवाई न होने पर महिला थाने में पत्नी फूट-फूटकर रोने लगी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी कर्मचारी और उसके परिवार की ओर से लगातार धमकियां दी जा रही हैं। उन्हें चुप रहने के लिए दबाव बनाया जा रहा है और कहा जा रहा है कि “हम जो कहें वही बोलो, वरना अंजाम भुगतना पड़ेगा।” इस पूरे मामले ने न सिर्फ सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े पर क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित परिवार को कब इंसाफ मिलता है।

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