बांदा में बहुचर्चित यौन शोषण मामले में दोषी पाए गए जेई रामभवन और उनकी पत्नी दुर्गावती की फांसी की सजा टलवाने के लिए दायर अपील को हाई कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इस मामले की सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। दंपति को बांदा पॉक्सो न्यायालय ने 20 फरवरी 2026 को फांसी की सजा सुनाई थी। रामभवन और दुर्गावती वर्तमान में मंडल कारागार में बंद हैं। रामभवन के भाई ने हाई कोर्ट में यह अपील दायर की थी। अधिवक्ता भूरा निषाद ने बताया कि दंपत्ति को मिली फांसी की सजा के खिलाफ 17 मार्च को हाई कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। हाई कोर्ट में रामभवन और उनकी पत्नी की पैरवी अधिवक्ता संजीव शर्मा और पूजा अग्रवाल कर रहे हैं। वे 15 अप्रैल को सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखेंगे। जनपद चित्रकूट के सिंचाई विभाग से निलंबित जेई रामभवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को सीबीआई ने 17 नवंबर 2020 को गिरफ्तार किया था। उन पर 33 बच्चों का यौन शोषण करने और उनके अश्लील वीडियो 47 देशों में बेचने का आरोप था। कैपिटल केस, यानी मृत्युदंड के मामले, वे होते हैं जिनमें दोषी पाए जाने पर अभियुक्त को मौत की सजा दी जाती है। इनमें आमतौर पर प्रथम श्रेणी की हत्या के मामले शामिल होते हैं, चाहे वे पूर्व नियोजित हों या जघन्य अपराध-हत्या सिद्धांत पर आधारित हों।

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