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अलीगढ़ में शोभायात्रा पर विवाद:नए मार्ग की अनुमति न मिलने से देर रात थाने पर हंगामा, पदाधिकारियों का इस्तीफा, बाजार रहेंगे बंद

अलीगढ़ में रामनवमी पर निकलने वाली शोभायात्रा को लेकर आयोजक और प्रशासनिक अधिकारी आमने–सामने आ गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने श्री दुर्गा महारानी शोभायात्रा के मार्ग परिवर्तन में परिवर्तन करने से मना कर दिया। इसे लेकर मंगलवार देर रात थाना देहलीगेट पर जमकर विरोध हुआ। प्रशासन के न मानने पर बुधवार को शहर के मुख्य बाजार बंद रखने का फैसला किया गया है। आयोजकों का तर्क, पुराना रास्ता सुरक्षित नहीं शोभायात्रा हर साल पारंपरिक मार्ग से निकलती है। यह कनवरीगंज से कटरा होकर निकाली जाती है। आयोजकों का कहना है कि कटरा की गलियां इतनी तंग हैं कि वहां आपात स्थिति में एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड भी नहीं पहुंच सकती। वहीं, बिजली के जर्जर और लटकते तार बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं। समिति चाहती है कि यात्रा अब्दुल करीम चौराहा और सब्जी मंडी वाले चौड़े रास्ते से निकले। 45 सदस्यों ने सामूहिक इस्तीफा दिया प्रशासन द्वारा नए मार्ग की अनुमति देने से इनकार करने और नोटिस जारी करने से नाराज श्री दुर्गा महारानी मंदिर सेवा समिति की पूरी कार्यकारिणी ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इनमें समिति के अध्यक्ष अखिल मांगलिक, संरक्षक व पूर्व मेयर शकुंतला भारती, मंत्री अरुण कुमार, कोषाध्यक्ष निर्मल कुमार और उपाध्यक्ष अखिलेश चंद्र वाष्र्णेय समेत सभी 45 सदस्य शामिल हैं। समिति का कहना है कि यदि प्रशासन सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता, तो वे किसी अनहोनी की जिम्मेदारी लेकर शोभायात्रा का संचालन नहीं करेंगे। भाजपा नेता भी मैदान में इस विवाद में अब भाजपा के दिग्गज नेता भी कूद पड़े हैं। मंगलवार रात थाने के घेराव के दौरान पूर्व मेयर शकुंतला भारती और पूर्व महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत ने विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि प्रशासन जानबूझकर हिंदू समाज की भावनाओं की अनदेखी कर रहा है। पांच बड़े व्यापारिक क्षेत्र रहेंगे बंद विरोध को व्यापक बनाने के लिए बुधवार को पांच बड़े व्यापारिक क्षेत्रों में पूर्ण बंदी का आह्वान किया गया है। इनमें यात्रा शुरू होने वाले स्थान कनवरीगंज और कटरा पूर्ण रूप से बंद रहेंगे। महावीरगंज, बड़ा बाजार, रेलवे रोड बंद रहेंगे। नई परंपरा नहीं होगी शुरू एडीएम सिटी किंशुक श्रीवास्तव का कहना है कि शोभायात्रा हमेशा जिस मार्ग से जाती है। उसी की अनुमति दी जाएगी। नई परंपरा शुरू नहीं की जा सकती है। संवेदनशील इलाकों में नए रूट से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा रहता है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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