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युवतियों में 10 गुना बढ़ा बच्चेदानी में गांठ का खतरा:15 साल की उम्र में आ रहे मामले; खान-पान और प्रदूषण बन रहे ‘साइलेंट किलर’

आज के दौर की भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़ते खान-पान का सबसे बुरा असर महिलाओं की सेहत पर पड़ रहा है। जच्चा-बच्चा अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग द्वारा किए गए हालिया सर्वे में एक डरावनी तस्वीर सामने आई है। रिसर्च के अनुसार, महिलाओं और खासकर कम उम्र की युवतियों में बच्चेदानी में गांठ की समस्या बिजली की रफ्तार से बढ़ी है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा द्विवेदी के नेतृत्व में हुई इस रिसर्च ने चेतावनी दी है कि जो समस्या पहले 30 साल की उम्र के बाद देखी जाती थी, वह अब 15 साल की किशोरियों में भी आम हो गई है। पिछले 5 सालों में बिगड़े हालात 3% से बढ़कर 30% हुए मामले डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि,पिछले 5-6 सालों में इस बीमारी के ग्राफ में भारी उछाल आया है। केस स्टडी बताती है कि पहले अस्पताल आने वाली 100 महिलाओं में से केवल 2 या 3 महिलाओं में ही गांठ की समस्या मिलती थी, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 20 से 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यानी हर 10 में से लगभग 3 महिलाएं इस गंभीर समस्या से जूझ रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चेदानी में गांठ होने पर शरीर कई संकेत देता है जिन्हें अक्सर युवतियां सामान्य समझकर छोड़ देती हैं। इसमें महावारी के दौरान असहनीय दर्द होना, अत्यधिक ब्लीडिंग की समस्या और पीरियड्स का समय पर न आना मुख्य रूप से शामिल है। प्रदूषण और कीटनाशकों का घातक असर: रिसर्च में सामने आया है,कि हमारे वातावरण में मौजूद प्रदूषण और खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक शरीर के भीतर जाकर एस्ट्रोजन हार्मोन की नकल करते हैं। इससे शरीर का प्राकृतिक हार्मोनल संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है और गांठ बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसके अलावा आज के समय में तनाव भी इसका एक बहुत बड़ा कारण बनकर उभरा है, जो सीधे तौर पर महिलाओं के प्रजनन तंत्र को प्रभावित कर रहा है। जंक फूड और मोटापे का ‘जहरीला’ कॉम्बिनेशन डॉ. सीमा द्विवेदी के मुताबिक मैदा,तैलीय पदार्थ और पोषक तत्व विहीन जंक फूड शरीर में मोटापा बढ़ाते हैं। यह मोटापा सीधे तौर पर हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है। आज के समय में कुपोषण यानी माल-नरिशमेंट दो तरह का देखने को मिल रहा है। एक वह जहां शरीर में जरूरी तत्वों की कमी है और दूसरा वह जहाँ युवा सिर्फ मैदा या जंक फूड खा रहे हैं जिससे पेट तो भर रहा है लेकिन शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पा रहा है। यही असंतुलन शरीर के भीतर बीमारियों का घर बना रहा है।

सही जीवनशैली और समय पर परामर्श ही है समाधान डॉ. सीमा द्विवेदी ने इस गंभीर समस्या से बचने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि आहार-विहार का सही होना और शारीरिक सक्रियता इस बीमारी को रोकने में सबसे कारगर है। यदि किसी भी युवती या महिला को महावारी में अनियमितता या किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी महसूस होती है, तो उन्हें घरेलू नुस्खों के भरोसे बैठने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। समय पर सही इलाज और संतुलित खान-पान ही इस बढ़ते खतरे से बचाव का एकमात्र रास्ता है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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