गाजीपुर में चैत्र नवरात्रि के दौरान छठ पूजा का आयोजन किया गया। यह पर्व सूर्य देव और प्रकृति की आराधना के लिए मनाया जाता है, जिसे संतान सुख, परिवार की समृद्धि और शारीरिक-मानसिक शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। गाजीपुर के ददरी घाट सहित विभिन्न गंगा घाटों पर महिलाओं ने तीन दिनों का निर्जला व्रत रखकर विधिवत पूजा-अर्चना की। सोमवार शाम को व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके बाद, मंगलवार सुबह उदयगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर इस पवित्र व्रत का समापन किया गया। ददरी घाट पर व्रत रखने वाली सोनी पांडे ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से चैत्र नवरात्रि में छठ पूजा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बेटे के लिए मांगी गई मन्नत पूरी होने के बाद उन्होंने यह व्रत रखना शुरू किया है। पांडे ने सोमवार शाम को अस्त होते सूर्य और मंगलवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पूरे नियम के साथ व्रत का पालन किया।
चैती छठ में नहाय-खाय, खरना और अर्घ्य देने जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं। यह शरीर को शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा के संचय में सहायक मानी जाती हैं। इस व्रत में सूर्य देव के साथ छठी मैया (ऊषा) की भी पूजा की जाती है, जिन्हें रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। यह पर्व मूल रूप से बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में प्रचलित था, लेकिन अब यह पूरे देश में आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन चुका है।

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