इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार पर तीसरी बार हर्जाना लगाया है। एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पंचायती राज विभाग द्वारा शपथ पत्र दाखिल न करने पर न्यायालय ने 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है। यह जनहित याचिका अंजनी कुमार द्विवेदी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें भूगर्भ जल के दूषित होने का मुद्दा उठाया गया है। याचिका वर्ष 2019 से विचाराधीन है। न्यायालय ने पाया कि इससे पहले भी संबंधित विभाग की ओर से जवाबी शपथ पत्र दाखिल न करने पर 5 जनवरी को पांच हजार रुपये और 19 जनवरी को पच्चीस हजार रुपये का हर्जाना लगाया जा चुका है। पिछली बार लघु सिंचाई व भूगर्भ जल विभाग ने शपथ पत्र दाखिल कर दिया था। हालांकि, 22 जनवरी को दिए गए आदेश के बावजूद पंचायती राज विभाग की ओर से शपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया। न्यायालय ने हर्जाना लगाने के साथ-साथ यह चेतावनी भी दी है कि वह भविष्य में अन्य कार्रवाई किए जाने पर भी विचार कर सकती है।

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