पीलीभीत में स्वास्थ्य विभाग के सीएमओ कार्यालय से बर्खास्त पूर्व आयुष्मान मैनेजर अरुण कुमार मौर्य की मुश्किलें बढ़ गई हैं। धोखाधड़ी और लाखों रुपये हड़पने के आरोप में पुलिस अधीक्षक के आदेश पर अरुण मौर्य और उसके परिजनों के खिलाफ दो नई प्राथमिकियां (FIR) दर्ज की गई हैं। इसके साथ ही इस मामले में दर्ज कुल मुकदमों की संख्या बढ़ गई है, क्योंकि पहले भी दो लोग इस गिरोह के खिलाफ शिकायत दर्ज करा चुके हैं। पहली नई प्राथमिकी नगर पंचायत नौगवा पकड़िया निवासी प्रशांत गंगवार की शिकायत पर दर्ज की गई है। प्रशांत का आरोप है कि छतरी चौराहा स्थित ‘मौर्य मेडिकल स्टोर’ के संचालक रमाकांत मौर्य और उनके बेटे अरुण कुमार मौर्य ने उन्हें प्लॉट बेचने का झांसा दिया था। पीड़ित ने किस्तों में कुल 10 लाख 80 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने रकम हड़पने के बाद न तो प्लॉट की रजिस्ट्री की और न ही पैसे वापस किए। जब प्रशांत ने दबाव बनाया, तो आरोपियों ने एक एग्रीमेंट किया, लेकिन उसकी समय सीमा बीतने के बाद भी प्लॉट नहीं दिया गया। अब पिता-पुत्र एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं और पीड़ित को फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रहे हैं। दूसरी प्राथमिकी सीएमओ कार्यालय में तैनात सहायक शोध अधिकारी पियूष कुमार सिंह की शिकायत पर दर्ज हुई है। पियूष के अनुसार, अरुण मौर्य ने पारिवारिक समस्या का हवाला देकर उनसे 15 लाख रुपये उधार लिए थे। अरुण ने आधा पैसा तो वापस कर दिया, लेकिन शेष 7 लाख 47 हजार रुपये के लिए टालमटोल करने लगा। पियूष ने आरोप लगाया है कि इस धोखाधड़ी की साजिश में अरुण की पत्नी नीतू मौर्य (शिक्षिका, बरेली), पिता रमाकांत और भाई अभिनव मौर्य भी शामिल हैं। आरोपियों ने पियूष को गुमराह करने के लिए बैंक की जाली रसीदें और फर्जी ऑनलाइन ट्रांसफर मैसेज दिखाए। जब पीड़ित बैंक पहुंचा, तब उसे ठगी का पता चला। पैसे वापस मांगने पर उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है। ठगी के इस बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप है। पुलिस अधीक्षक के कड़े रुख के बाद सुनगढ़ी कोतवाली में संबंधित धाराओं में मुकदमे दर्ज कर लिए गए हैं। पुलिस अब साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। विभाग से बर्खास्त होने के बाद अरुण मौर्य द्वारा रचे गए इस ‘ठगी के साम्राज्य’ की परतें अब एक-एक कर खुलने लगी हैं।

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