आगरा में डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय में कर्मचारी संघ चुनाव की पत्रावली गायब होने का मामला विरोध में बदल गया। मंगलवार को धरने के बीच कर्मचारी नेता सुमित चौधरी ने मुंडन कराकर और भगवा वस्त्र धारण कर प्रशासन के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। नंगे पैर विश्वविद्यालय आने का ऐलान करते हुए उन्होंने साफ कहा- जब तक चुनाव की तारीख घोषित नहीं होगी, यह विरोध और तेज होगा।
विश्वविद्यालय में लंबे समय से कर्मचारी संघ चुनाव लंबित है। कर्मचारी नेता अनिल श्रीवास्तव और सुमित चौधरी लगातार ज्ञापन देकर चुनाव कराने की मांग कर रहे थे। सूत्रों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के लिए पत्रावली भी तैयार हुई, लेकिन अचानक अधिकारियों के कार्यालय से गायब हो गई। धरने पर बैठे कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि यह कोई सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश है ताकि चुनाव टल सके और मौजूदा पदाधिकारी अपनी कुर्सी बचाए रख सकें। कर्मचारियों ने लगाया आरोप कर्मचारी नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और वर्तमान कर्मचारी संघ पदाधिकारी एकजुट होकर चुनाव टालने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
सुमित चौधरी ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की कई समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन मौजूदा पदाधिकारी कोई समाधान नहीं करा सके। अब उन्हें हार का डर सता रहा है, इसलिए चुनाव से बचने के लिए फाइल तक गायब करा दी गई। वहीं अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि कई दिनों से चल रहे धरने के बावजूद प्रशासन पूरी तरह मौन है, जिससे उनकी मंशा पर और सवाल खड़े हो रहे हैं। धरने में कर्मचारियों की भारी भीड़ जुट रही है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस बार चुनाव होने पर कई नए चेहरे सामने आ सकते हैं। कर्मचारियों के बीच असंतोष गहराता जा रहा है और यह मुद्दा अब विश्वविद्यालय की साख से भी जुड़ता जा रहा है। अगर जल्द चुनाव की तारीख घोषित नहीं हुई, तो यह विरोध और उग्र रूप ले सकता है। प्रशासन की चुप्पी और कर्मचारियों का आक्रोश, दोनों मिलकर आने वाले दिनों में बड़े टकराव की जमीन तैयार कर रहे हैं।

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